UP के 'जांबाज' IPS कृष्ण कुमार विश्नोई सम्मानित: विपरीत हालातों में अदम्य साहस दिखाने वाले अफसर को सरकार का सलाम
यूपी सरकार ने IPS कृष्ण कुमार विश्नोई को उत्कृष्ट सेवा के लिए सम्मानित किया है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने और कठिन चुनौतियों में निडर रहने वाले इस अफसर की पूरी कहानी
उत्तर प्रदेश अपनी सख्त कानून-व्यवस्था और 'जीरो टॉलरेंस' नीति के लिए जाना जाता है। इस नीति को जमीन पर उतारने का श्रेय उन जांबाज पुलिस अधिकारियों को जाता है, जो अपनी जान की परवाह किए बिना विपरीत परिस्थितियों में डटे रहते हैं। वर्ष 2024-2025 में ऐसा ही एक नाम उभरकर सामने आया— आईपीएस कृष्ण कुमार (के.के.) विश्नोई। हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार ने उनकी उत्कृष्ट सेवाओं और कर्तव्यनिष्ठा के लिए उन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया है।
संभल का वह भीषण उपद्रव और चुनौतीपूर्ण हालात
वर्ष 2024-2025 के दौरान उत्तर प्रदेश के संभल जिले में एक धार्मिक स्थल से जुड़े विवाद ने हिंसक रूप ले लिया था। यह उस साल की सबसे बड़ी कानून-व्यवस्था की चुनौती बनकर उभरी। स्थिति इतनी संवेदनशील थी कि चंद मिनटों की चूक पूरे प्रदेश में सांप्रदायिक तनाव पैदा कर सकती थी। उपद्रवियों ने योजनाबद्ध तरीके से पथराव और हिंसा शुरू कर दी थी, जिससे आम जनता और प्रशासन के बीच भारी तनाव पैदा हो गया था।
जब ढाल बनकर खड़े हो गए के.के. विश्नोई
संभल की हिंसा के दौरान एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ, जिसने पूरे देश का ध्यान खींचा। इस वीडियो में आईपीएस कृष्ण कुमार विश्नोई दंगाइयों की भीड़ के सामने निडर होकर सीना ताने खड़े नजर आए। जहाँ चारों तरफ से पत्थरबाजी और नारेबाजी हो रही थी, वहां विश्नोई ने न केवल अपनी टीम का नेतृत्व किया, बल्कि अपराधियों के मन में पुलिस का खौफ भी बनाए रखा। उनकी उस 'दबंग' छवि और निडरता ने प्रदर्शनकारियों के हौसले पस्त कर दिए।
शांति बहाली और साक्ष्य जुटाने में निभाई अहम भूमिका
एक पुलिस अधिकारी की परीक्षा केवल उपद्रव शांत करने तक सीमित नहीं होती, बल्कि असली चुनौती हिंसा के बाद शांति बनाए रखना और दोषियों को सजा दिलाना होती है। के.के. विश्नोई ने इस मोर्चे पर भी शानदार काम किया:
• त्वरित कार्रवाई: उन्होंने हिंसा को संभल की गलियों से बाहर फैलने से रोका।
• शांति बहाली: स्थानीय नागरिकों से संवाद कर इलाके में दोबारा भरोसा कायम किया।
• साक्ष्य संकलन: दंगाइयों के खिलाफ पुख्ता सबूत जुटाने और जांच रिपोर्ट तैयार करने में तकनीकी और रणनीतिक कौशल का परिचय दिया।
• सरकारी निर्देशों का पालन: शासन के आदेशों को अक्षरशः जमीन पर लागू कर सुशासन की मिसाल पेश की।
सरकार की रीढ़ हैं ऐसे जांबाज अधिकारी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने के.के. विश्नोई को सम्मानित कर यह संदेश दिया है कि जो अधिकारी जनता की सुरक्षा के लिए फ्रंटफुट पर आकर खेलेंगे, उन्हें उचित सम्मान मिलेगा। जानकार मानते हैं कि ऐसे ही कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी सरकार की रीढ़ होते हैं। विपरीत परिस्थितियों में धैर्य न खोना और कानून के शासन को सर्वोपरि रखना ही के.के. विश्नोई की कार्यशैली की पहचान है।