जयपुर में पहली बार सेना दिवस परेड, स्वदेशी हथियारों और शौर्य का भव्य प्रदर्शन

जयपुर में 78वें सेना दिवस परेड का ऐतिहासिक आयोजन, स्वदेशी हथियार, शौर्य, संस्कृति और हवाई करतबों का अद्भुत नजारा

Jan 15, 2026 - 16:23
जयपुर में पहली बार सेना दिवस परेड, स्वदेशी हथियारों और शौर्य का भव्य प्रदर्शन

ऐतिहासिक अंदाज में राजस्थान की राजधानी जयपुर में मनाया। जगतपुरा स्थित महल रोड पर आयोजित इस भव्य परेड ने सैन्य परंपरा, अनुशासन और आधुनिक क्षमताओं का अनूठा संगम प्रस्तुत किया। यह चौथी बार रहा जब सेना दिवस परेड दिल्ली के बाहर आयोजित हुई और पहली बार किसी असैन्य क्षेत्र में इसका आयोजन किया गया। राजस्थान को इस गौरवपूर्ण आयोजन की मेजबानी का अवसर मिलना राज्य के लिए खास उपलब्धि रहा।

गरिमामयी उपस्थिति ने बढ़ाई शोभा

इस ऐतिहासिक आयोजन में राज्यपाल श्री हरिभाऊ किसनराव बागडे, मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा, मिजोरम के राज्यपाल जनरल (से.नि.) वीके सिंह, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, सप्तशक्ति कमान के सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह सहित अनेक सैन्य और नागरिक गणमान्य उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने सेना के शौर्य और अनुशासन को नजदीक से देखा और सराहा।

परेड का निरीक्षण और मार्च पास्ट

थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने परेड का निरीक्षण कर सलामी ली। दक्षिण पश्चिम कमान के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल हरविंदर सिंह के नेतृत्व में परेड आयोजित हुई। इस वर्ष की थीम ‘भारतीय सेना—शौर्य और बलिदान’ रखी गई थी, जो पूरे आयोजन में स्पष्ट रूप से दिखाई दी। नवगठित भैरव बटालियन सहित भारतीय सेना की सात रेजीमेंट्स की टुकड़ियों ने अनुशासित मार्च पास्ट किया।

स्वदेशी हथियार और आधुनिक तकनीक का प्रदर्शन

सेना दिवस परेड का सबसे बड़ा आकर्षण स्वदेशी हथियारों और आधुनिक सैन्य प्रणालियों का प्रदर्शन रहा। ब्रह्मोस मिसाइल, भीष्म और अर्जुन टैंक, के-9 वज्र तोप, बीएमपी वाहन, पिनाका रॉकेट लॉन्चर, नाग मिसाइल सिस्टम, ड्रोन शक्ति, ड्रोन जैमर तकनीक और इलेक्ट्रिक ऑल-टेरेन व्हीकल ने दर्शकों का ध्यान खींचा। इसके साथ ही रोबोटिक म्यूल, स्वाथी वेपन लोकेटिंग रडार, मॉड्यूलर ब्रिजिंग सिस्टम और मोबाइल कम्युनिकेशन नोड जैसी उन्नत प्रणालियों ने भारतीय सेना की तकनीकी मजबूती को दर्शाया।

वीरता का सम्मान

परेड से पहले ऑपरेशन ‘सिंदूर’ और अन्य अभियानों में अदम्य साहस दिखाने वाले पांच शूरवीरों—सूबेदार मेजर पवन कुमार, हवलदार सुनील कुमार सिंह, लांस नायक दिनेश कुमार, लांस नायक सुभाष कुमार और लांस नायक प्रदीप कुमार—को मरणोपरांत सेना मेडल (गैलेंट्री) से सम्मानित किया गया। यह क्षण भावुक करने वाला रहा और वीर जवानों के बलिदान को नमन करने का अवसर बना।

महिला भागीदारी और अंतरराष्ट्रीय झलक

महिलाओं की बढ़ती भूमिका को दर्शाने के लिए गर्ल्स एनसीसी टुकड़ी ने भी मार्च पास्ट किया। भारतीय सेना के विभिन्न बैंड्स के साथ नेपाल आर्मी बैंड की भागीदारी ने भारत-नेपाल के मजबूत सैन्य संबंधों को रेखांकित किया।

राजस्थानी संस्कृति और हवाई करतब

आयोजन में राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक झलक भी देखने को मिली। कच्छी घोड़ी, गैर, कालबेलिया और दंगल जैसे लोकनृत्यों ने माहौल को रंगीन बना दिया। तीन चेतक हेलीकॉप्टरों ने तिरंगे के साथ पुष्पवर्षा की, जबकि अपाचे हेलीकॉप्टरों और अंत में तीन जगुआर लड़ाकू विमानों की गर्जना ने पूरे समारोह को रोमांचक समापन दिया।

जनसहभागिता से बना यादगार आयोजन

बड़ी संख्या में नागरिक, पूर्व सैनिक, युवा और छात्र-छात्राएं इस ऐतिहासिक सेना दिवस परेड के साक्षी बने। जयपुर में आयोजित यह समारोह न केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन था, बल्कि आत्मनिर्भर और नए भारत की मजबूत तस्वीर भी पेश करता नजर आया।