राजस्थान कांग्रेस में बड़ा संगठनात्मक मंथन, आज घोषित हो सकते हैं शेष पाँच जिलाध्यक्ष
दिल्ली में कांग्रेस की अहम बैठक, राजस्थान के पाँच जिलों में आज हो सकती है जिलाध्यक्षों की घोषणा
राजस्थान कांग्रेस संगठन में लंबे समय से अटकी जिलाध्यक्षों की नियुक्ति प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती नजर आ रही है। जिला अध्यक्षों की घोषणा के बाद संगठन को जमीनी स्तर पर सक्रिय करने और आगामी राजनीतिक रणनीति को मजबूती देने की तैयारी है। इसी कड़ी में आज दिल्ली में राजस्थान कांग्रेस की एक अहम संगठनात्मक बैठक आयोजित की जा रही है, जिसे पार्टी के संगठनात्मक पुनर्गठन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दिल्ली में होगी अहम संगठनात्मक बैठक
सूत्रों के मुताबिक, राजस्थान कांग्रेस की यह महत्वपूर्ण बैठक पार्टी के राजस्थान प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा की अध्यक्षता में होगी। बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा भी शामिल होंगे। बताया जा रहा है कि डोटासरा पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं और शीर्ष नेतृत्व के साथ शेष बचे जिलाध्यक्षों के नामों को लेकर अंतिम मंथन किया जाएगा।कांग्रेस नेतृत्व की कोशिश है कि लंबे समय से लंबित इस संगठनात्मक प्रक्रिया को जल्द पूरा किया जाए, ताकि पार्टी को जमीनी स्तर पर फिर से मजबूत किया जा सके।
पाँच जिलों पर टिकी निगाहें
राजस्थान कांग्रेस के जिन पाँच जिलों में अब तक जिला अध्यक्षों की नियुक्ति नहीं हो पाई है, उनमें बारां, झालावाड़, प्रतापगढ़, राजसमंद और जयपुर शहर शामिल हैं। इन जिलों के जिलाध्यक्षों की घोषणा को लेकर आज अंतिम सहमति बनने की संभावना जताई जा रही है।पार्टी सूत्रों का कहना है कि इन जिलों में संगठनात्मक संतुलन और आगामी चुनावी रणनीति को ध्यान में रखते हुए नाम तय किए जाएंगे।
क्यों अटकी थी नियुक्ति प्रक्रिया
इन पाँच जिलों में जिलाध्यक्षों की घोषणा अब तक इसलिए नहीं हो पाई थी, क्योंकि यहां एक से अधिक दावेदार सामने थे। संगठनात्मक संतुलन, जातीय समीकरण और गुटबाजी जैसे मुद्दों के कारण स्थानीय स्तर पर सहमति नहीं बन पा रही थी।कुछ जिलों में पुराने संगठनात्मक विवाद भी सामने आए थे, जिसके चलते पार्टी नेतृत्व को सूची रोकनी पड़ी। कांग्रेस नेतृत्व नहीं चाहता था कि किसी भी तरह की जल्दबाजी में ऐसा फैसला लिया जाए, जिससे संगठन में असंतोष या आपसी टकराव बढ़े।
केंद्रीय स्तर पर दोबारा मंथन
इन पाँच जिलों के नामों पर केंद्रीय स्तर पर दोबारा मंथन को जरूरी माना गया। पार्टी नेतृत्व की कोशिश है कि ऐसे चेहरों को जिम्मेदारी दी जाए, जो संगठन को एकजुट रखते हुए आने वाली चुनावी चुनौतियों का सामना कर सकें। कांग्रेस का मानना है कि जिला स्तर पर मजबूत और संतुलित नेतृत्व के बिना संगठन को सक्रिय रखना मुश्किल है। यही वजह है कि इन नियुक्तियों को लेकर विशेष सावधानी बरती जा रही है।
संगठन को मजबूत करने पर फोकस
जिला अध्यक्षों की नियुक्ति के बाद कांग्रेस संगठन को जमीनी स्तर पर सक्रिय करने की योजना पर काम शुरू करेगी। पार्टी का फोकस बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरने और आगामी चुनावों के लिए स्पष्ट रणनीति तैयार करने पर रहेगा। कांग्रेस नेतृत्व जिला अध्यक्षों को संगठन और जनता के बीच सेतु के रूप में देख रहा है। ऐसे में पार्टी चाहती है कि जिलाध्यक्ष न केवल संगठन को मजबूत करें, बल्कि जनता से सीधा संवाद भी स्थापित करें।
आज की बैठक क्यों है अहम
आज होने वाली यह बैठक राजस्थान कांग्रेस के संगठनात्मक पुनर्गठन के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है। अगर शेष पाँच जिलों के जिलाध्यक्षों के नामों पर सहमति बन जाती है, तो यह पार्टी के लिए एक बड़ा संगठनात्मक कदम होगा। लंबे समय से अटकी इस प्रक्रिया के पूरा होने से कांग्रेस को आगामी राजनीतिक रणनीति को धार देने में मदद मिलेगी और संगठनात्मक स्तर पर नई ऊर्जा का संचार होने की उम्मीद जताई जा रही है।