राजस्थान का ड्रग किंग गूगल से फैक्ट्री ढूंढता था करोड़ों की संपत्ति बनाई अब जेल में सलाखों के पीछे
राजस्थान पुलिस की ANTF और ATS ने 16-17 जनवरी 2026 को कोलकाता (न्यू टाउन इलाके) से रमेश कुमार विश्नोई उर्फ अनिल उर्फ रामलाल (31 वर्ष, धोरीमन्ना, बाड़मेर निवासी) को गिरफ्तार किया। वह राजस्थान के टॉप-10 मोस्ट वांटेड अपराधियों में शामिल था और 8 साल से फरार था (₹1 लाख इनामी)।
जयपुर। राजस्थान के टॉप-10 मोस्ट वांटेड अपराधियों में शुमार एमडी ड्रग्स का मास्टरमाइंड रमेश कुमार विश्नोई उर्फ अनिल उर्फ रामलाल (31) आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) की पूछताछ में उसने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। गूगल मैप्स की मदद से खाली इलाकों में छिपी जगहें तलाशना, करोड़ों की प्रॉपर्टी खड़ी करना और दुनिया की किसी एजेंसी से न पकड़े जाने का दावा—यह सब उसकी 'स्मार्ट' अपराध की दुनिया का हिस्सा था। ANTF के आईजी विकास कुमार ने बताया कि यह गिरफ्तारी ड्रग्स माफिया के खिलाफ बड़ी कामयाबी है। आइए, विस्तार से जानते हैं इस ड्रग किंग की कहानी।
जेल से निकला 'गुरु' का शागिर्द: सप्लायर से बना पार्टनर
रमेश विश्नोई की अपराध की दुनिया में एंट्री महाराष्ट्र की जेल से हुई। यहां बंद उसके 'गुरु' डॉ. बीरजू ने उसे एमडी ड्रग्स की सप्लाई का काम सौंपा। शुरू में रमेश गुजरात-महाराष्ट्र से ड्रग्स लाकर राजस्थान में बेचता था, लेकिन प्रॉफिट कम और रिस्क ज्यादा होने से वह असंतुष्ट था। करीब डेढ़ साल पहले डॉ. बीरजू ने उसे एमडी ड्रग्स बनाने का सीक्रेट फॉर्मूला शेयर किया। 'गुरु दक्षिणा' के तौर पर पार्टनरशिप तय हुई और डॉ. बीरजू ने एक केमिस्ट भी भेजा। इस तरह 12वीं फेल रमेश ड्रग्स का बड़ा खिलाड़ी बन गया। राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना और कर्नाटक की जेलों में सजा काट चुके इस माफिया के खिलाफ कुल 36 केस दर्ज हैं।
गूगल मैप्स का 'ड्रग टूल': खाली जगहों पर फैक्ट्री, 1.5 लाख किराया
रमेश की चालाकी का सबसे रोचक पहलू था गूगल का इस्तेमाल। वह एमडी ड्रग्स बनाने के लिए गूगल पर खाली इलाकों की तलाश करता था। जहां बड़ी खाली जगहों में छोटा कमरा मिलता, वहां फैक्ट्री सेटअप करता। जगह पर पहुंचकर बिजली सप्लाई चेक करता और अगर सब ठीक तो काम शुरू। खुद को केमिकल बिजनेसमैन बताकर मालिक से मिलता और कहता कि 'शोर-शराबे से दूर दो महीने रिसर्च करूंगा'। इसके बदले 1.5 लाख रुपए प्रति महीने तक किराया देने का लालच देता। दो महीनों में 40-50 किलोग्राम एमडी ड्रग्स बनाता और फिर 'काम पूरा' कहकर जगह खाली कर देता। इस तरह शक की गुंजाइश नहीं छोड़ता। पश्चिमी राजस्थान में उसने दर्जनभर से ज्यादा ऐसी फैक्ट्रियां चलाईं।
एमडी ड्रग्स की 'ईजी रेसिपी': ट्रक में प्लांट, 29 लाख प्रॉफिट प्रति किलो
आईजी विकास कुमार के मुताबिक, एमडी ड्रग्स का धंधा तेजी से फैलने की वजह है इसके केमिकल्स की आसान उपलब्धता। बनाने की प्रक्रिया इतनी सरल है कि पूरा प्लांट एक ट्रक के डाले जितनी जगह में लग जाता है। एक बार में 10 किलो ड्रग्स बनाते थे। प्रति किलो बनाने में 1 लाख रुपए खर्च आता, लेकिन मार्केट में इसे बेचकर 29 लाख रुपए का मुनाफा कमाते। पिछले डेढ़ साल में रमेश ने ऐसी फैक्ट्रियों से करोड़ों कमाए। अवैध कमाई से गांव में करोड़ों का मकान बनवाया, दो ट्यूबवेल लगवाए, लोगों का उधार चुकाया और लग्जरी लाइफ जीने लगा। कुल मिलाकर 25 करोड़ की प्रॉपर्टी खरीदी, जिसमें मकान, फार्म हाउस, दुकान और मार्बल फैक्ट्री शामिल हैं।
'दुनिया की कोई एजेंसी नहीं पकड़ सकती': रोज पत्नी से बात, 10 दिन में मोबाइल चेंज
पूछताछ में रमेश ने दावा किया कि वह रोज अपनी पत्नी से बात करता था, लेकिन जिस तरीके से—उसे दुनिया की कोई एजेंसी ट्रैक नहीं कर सकती। पत्नी से बात के बाद भी वह सुरक्षित रहता। अपने मोबाइल और सिमकार्ड को हर 10 दिन में बदल देता। रोड ट्रैवल से बचने के लिए हमेशा एयर ट्रैवल करता, ताकि नाकाबंदी में न फंसे। महाराष्ट्र जेल में मिले गुरु डॉ. बीरजू ने उसकी जिंदगी ही बदल दी—साधारण अपराधी से लग्जरी माफिया बना दिया।
कोलकाता में 'केमिस्ट टीचर' की जिंदगी: AGTF की दबिश से गिरफ्तार
दिसंबर 2025 से रमेश कोलकाता में किराए के फ्लैट में छिपा था। खुद को केमिकल बिजनेसमैन और केमिस्ट्री टीचर बताकर रह रहा था। वहां एक नया बिजनेस शुरू करने की जुगाड़ में लगा था। लेकिन ANTF की स्पेशल टीम ने कड़ी मेहनत से उसकी लोकेशन ट्रैक की और दबिश देकर पकड़ लिया। लग्जरी लाइफ जी रहे इस माफिया को अब सलाखों के पीछे भेज दिया गया है। आईजी विकास कुमार ने कहा कि यह गिरफ्तारी ड्रग्स नेटवर्क को तोड़ने में मील का पत्थर साबित होगी।यह मामला न सिर्फ ड्रग्स माफिया की चालाकी दिखाता है, बल्कि पुलिस की मुस्तैदी भी। क्या ऐसे अपराधी फिर से सिर उठाएंगे? सवाल बाकी है, लेकिन ANTF की यह कामयाबी उम्मीद जगाती है।