राजस्थान के स्कूलों में आवारा कुत्तों पर सख्ती, शिक्षकों को मिली नई जिम्मेदारी

राजस्थान के स्कूलों में अब आवारा कुत्तों पर सख्ती, सुरक्षा जिम्मेदारी शिक्षकों पर, आदेश से मचा हड़कंप

Jan 8, 2026 - 15:43
राजस्थान के स्कूलों में आवारा कुत्तों पर सख्ती, शिक्षकों को मिली नई जिम्मेदारी

राजस्थान के शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों के लिए एक अहम और सख्त आदेश जारी किया है, जिसकी चर्चा इन दिनों शिक्षा जगत से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक हो रही है। इस आदेश के तहत अब स्कूलों में पढ़ाई के साथ-साथ छात्रों और स्टाफ की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त जिम्मेदारियां तय की गई हैं। खास बात यह है कि स्कूल परिसर से आवारा कुत्तों को दूर रखना और उन्हें पकड़वाने की जिम्मेदारी भी स्कूल प्रशासन और शिक्षकों पर डाली गई है।

क्या है शिक्षा विभाग का नया आदेश?

शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि हर स्कूल को यह सुनिश्चित करना होगा कि परिसर में किसी भी तरह का खतरा न हो, खासकर आवारा कुत्तों से। विभाग का कहना है कि हाल के दिनों में कुत्तों के काटने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं, जिससे बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हुई है। इसी को देखते हुए शिक्षा निदेशालय ने यह आदेश जारी किया है।इसके साथ ही यह भी तय किया गया है कि ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEEO) हर तीन महीने में स्कूलों का निरीक्षण करेंगे और यह जांचेंगे कि आदेशों की सही तरीके से पालना हो रही है या नहीं।

क्यों जारी करना पड़ा यह निर्देश?

पिछले कुछ समय में प्रदेश के अलग-अलग इलाकों से स्कूल परिसरों में कुत्तों के घुसने और बच्चों को काटने की घटनाएं सामने आई हैं। यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा, जहां कोर्ट ने आवारा कुत्तों से जुड़ी घटनाओं पर सख्त टिप्पणी की। इसके बाद शिक्षा विभाग ने छात्रों और स्टाफ की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता मानते हुए यह कदम उठाया।शिक्षा निदेशक सीताराम जाट की ओर से जारी निर्देशों में साफ कहा गया है कि बच्चों की सुरक्षा में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

स्कूलों को क्या-क्या इंतजाम करने होंगे?

नए आदेश के अनुसार स्कूलों को सबसे पहले अपने परिसर की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करनी होगी। इसके तहत स्कूलों में पर्याप्त बाड़, चारदीवारी और मजबूत गेट की व्यवस्था करना जरूरी होगा, ताकि आवारा कुत्ते अंदर प्रवेश न कर सकें।इसके अलावा स्कूल इंचार्ज और शिक्षक स्थानीय नगर निगम, विकास प्राधिकरण और प्रशासन से समन्वय कर आवारा कुत्तों को पकड़वाने की कार्रवाई करेंगे। स्कूल परिसर में साफ-सफाई पर भी विशेष ध्यान देना होगा। कचरा और जल निकासी की सही व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि कुत्ते स्कूल की ओर आकर्षित न हों।

स्वास्थ्य और जागरूकता पर भी जोर

शिक्षा विभाग ने यह भी तय किया है कि हर स्कूल को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से जोड़ा जाएगा, जहां रेबीज के टीके उपलब्ध हों। यदि किसी बच्चे को कुत्ता काट ले, तो उसे तुरंत इलाज मिल सके।इसके साथ-साथ बच्चों को यह सिखाया जाएगा कि जानवरों के आसपास किस तरह का व्यवहार करना चाहिए और किसी आपात स्थिति में क्या कदम उठाने हैं। इसका मकसद सिर्फ सुरक्षा ही नहीं, बल्कि जागरूकता भी बढ़ाना है।

शिक्षकों में क्यों है नाराजगी?

इस आदेश के बाद प्रदेश के शिक्षक संगठनों में असंतोष देखा जा रहा है। शिक्षकों का कहना है कि वे पहले से ही 50 से ज्यादा सरकारी योजनाओं और गैर-शैक्षणिक कार्यों में उलझे हुए हैं। अब स्कूल परिसर में आवारा कुत्तों पर नजर रखने और उन्हें पकड़वाने की जिम्मेदारी से उनकी मुख्य भूमिका, यानी पढ़ाने का काम प्रभावित होगा।शिक्षक संगठनों का तर्क है कि यह काम नगर निकाय और प्रशासन का है, न कि शिक्षकों का।

लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई

शिक्षा विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि निरीक्षण के दौरान स्कूल परिसर में आवारा कुत्ते पाए गए या आदेशों की अनदेखी हुई, तो संबंधित अधिकारियों और स्कूल इंचार्ज के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।कुल मिलाकर, यह आदेश छात्रों की सुरक्षा के लिहाज से अहम माना जा रहा है, लेकिन इसके क्रियान्वयन को लेकर शिक्षकों और विभाग के बीच मतभेद भी साफ नजर आ रहे हैं। अब देखना होगा कि यह व्यवस्था जमीन पर कितनी प्रभावी साबित होती है।