सौर ऊर्जा में नंबर वन बना राजस्थान, 35 हजार मेगावाट क्षमता से नया रिकॉर्ड

सौर ऊर्जा के दम पर राजस्थान बना देश का सोलर हब, किसानों और आमजन को मिली सस्ती बिजली

Dec 31, 2025 - 17:30
सौर ऊर्जा में नंबर वन बना राजस्थान, 35 हजार मेगावाट क्षमता से नया रिकॉर्ड

नया वर्ष राजस्थान के लिए ऊर्जा क्षेत्र में नई संभावनाओं का संदेश लेकर आया है। वर्षों तक बिजली संकट और कोयले पर निर्भरता से जूझने वाला प्रदेश अब सौर ऊर्जा के जरिए आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में लिए गए त्वरित और दूरदर्शी फैसलों के कारण राजस्थान आज देश के अग्रणी सोलर राज्यों में शामिल हो चुका है।

ऊर्जा संकट से ऊर्जा सरप्लस की ओर

एक समय था जब कोयले की कमी के कारण प्रदेश को बार-बार बिजली कटौती का सामना करना पड़ता था। अब स्थिति बदल रही है। वर्ष में लगभग 320 दिन मिलने वाली तेज धूप को विकास का आधार बनाते हुए राज्य सरकार ने नवीकरणीय ऊर्जा पर विशेष ध्यान दिया। सौर परियोजनाओं के लिए नीतिगत सुधार किए गए, निवेश प्रक्रियाएं आसान बनाई गईं और भूमि आवंटन को सरल किया गया। इन प्रयासों का परिणाम यह रहा कि सौर ऊर्जा परियोजनाएं समय पर पूरी होने लगीं और राज्य तेजी से ऊर्जा सरप्लस की ओर बढ़ रहा है।

दो वर्षों में सौर क्षमता में ऐतिहासिक बढ़ोतरी

वर्तमान में राजस्थान की स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता 35 हजार 910 मेगावाट से अधिक हो चुकी है। यह देश की कुल सौर ऊर्जा क्षमता का लगभग 27 प्रतिशत है। पिछले दो वर्षों में ही प्रदेश में 18 हजार मेगावाट से अधिक सौर क्षमता जुड़ी है। देश में भूमि आधारित सौर ऊर्जा क्षमता में भी राजस्थान का योगदान सबसे अधिक है, जिससे वह एक मजबूत सोलर हब के रूप में उभर रहा है।

पीएम कुसुम योजना से किसानों को राहत

किसानों को दिन में बिजली उपलब्ध कराने के लक्ष्य को साकार करने में पीएम कुसुम योजना ने अहम भूमिका निभाई है। इस योजना के तहत प्रदेश में सौर ऊर्जा क्षमता 122 मेगावाट से बढ़कर 2 हजार 629 मेगावाट हो गई है। गांव-ढाणियों में ग्रिड से जुड़ी 1 हजार 201 लघु सौर परियोजनाएं स्थापित की जा चुकी हैं। इससे 2 लाख 83 हजार से अधिक किसानों को दिन में बिजली मिल रही है और डीजल पंपों पर निर्भरता कम हुई है।

रूफटॉप सोलर से आमजन को सीधा लाभ

घरों की छतों पर सौर संयंत्र लगाकर आम लोग अब खुद बिजली पैदा कर रहे हैं। पीएम सूर्यघर योजना के तहत प्रदेश में 1 लाख 20 हजार से अधिक रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाए जा चुके हैं, जिनकी कुल क्षमता 481 मेगावाट है। इन योजनाओं के माध्यम से उपभोक्ताओं को न केवल बिजली बिल में राहत मिल रही है, बल्कि अतिरिक्त बिजली बेचकर आय का साधन भी बन रहा है। अब तक इस योजना में 824 करोड़ रुपये की केंद्रीय सब्सिडी वितरित की जा चुकी है।

150 यूनिट निःशुल्क बिजली योजना से बढ़ी बचत

राज्य सरकार की 150 यूनिट निःशुल्क बिजली योजना ने घरेलू उपभोक्ताओं को और राहत दी है। योजना शुरू होने के बाद अब तक 2 लाख 69 हजार से अधिक उपभोक्ता इससे जुड़ने की सहमति दे चुके हैं। सौर संयंत्र लगाने वाले पात्र उपभोक्ताओं को राज्य सरकार की ओर से 17 हजार रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी भी दी जा रही है, जिससे सोलर सिस्टम लगाना और आसान हो गया है।

भविष्य की जरूरतों के लिए तैयारी

प्रदेश में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। पीक ऑवर्स में मांग को पूरा करने के लिए बैटरी एनर्जी स्टोरेज पर भी काम किया जा रहा है। बीकानेर के पूगल क्षेत्र में बड़े सोलर पार्क और बैटरी भंडारण परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं। स्वच्छ ऊर्जा नीति-2024 के तहत वर्ष 2030 तक 115 गीगावाट अक्षय ऊर्जा और 10 गीगावाट ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।