अकबर की “रिश्तेदारी” पर शांति धारीवाल का तंज, विधानसभा में इतिहास को लेकर सियासी बहस
राज्यपाल के अभिभाषण पर बहस के दौरान शांति धारीवाल ने अकबर के शिलालेख को लेकर सरकार पर तीखा तंज कसा।
राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शांति धारीवाल ने अपनी बात शुरू करने से पहले ही सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने ऊर्जा मंत्री, पर्यटन मंत्री और शिक्षा मंत्री की सदन में मौजूदगी को लेकर सवाल पूछा और यह जानना चाहा कि क्या संबंधित मंत्री चर्चा के समय उपस्थित हैं या नहीं। इसी के साथ धारीवाल के संबोधन का अंदाज साफ हो गया कि वे सरकार पर तीखे तंज कसने वाले हैं।
अकबर और इतिहास को लेकर सरकार पर कटाक्ष
अपने भाषण में शांति धारीवाल ने इतिहास और मुगल शासक अकबर को लेकर सरकार की नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार नया इतिहास लिखने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर आमेर किले में अकबर की प्रशंसा वाला शिलालेख अब भी संरक्षित रखा गया है। धारीवाल ने व्यंग्य करते हुए कहा कि या तो सरकार इस शिलालेख को भूल गई है या फिर अकबर से अपनी “रिश्तेदारी” निभा रही है। उन्होंने सत्ता पक्ष की ओर देखते हुए चुटकी ली—“थी ना रिश्तेदारी अकबर से?”
शिलालेख का पाठ पढ़कर जताई आपत्ति
धारीवाल ने सदन में आमेर किले में मौजूद शिलालेख का पूरा पाठ भी पढ़ा। उन्होंने बताया कि उस पर लिखा है—“सुल्तानों को पनाह देने वाले शहंशाह, दीन और दुनिया के जलाल, मोहम्मद अकबर बादशाह, खुदाया बुजुर्ग उनका मुल्क हमेशा कायम रहे।” उन्होंने आरोप लगाया कि जहां एक तरफ कई जगहों से मुगल इतिहास को हटाया जा रहा है, वहीं इस शिलालेख को जानबूझकर सुरक्षित रखा गया है।
बीजेपी और कांग्रेस में हल्की नोकझोंक
धारीवाल के बयान के बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच हल्की तकरार देखने को मिली। कांग्रेस की ओर से बार-बार “रिश्तेदारी क्या थी, वो बता दो” जैसे तंज कसे गए। इस पर बीजेपी विधायक श्रीचंद कृपलानी ने टोका कि अगर धारीवाल की इतनी ही इच्छा है तो शिलालेख हटवा दिया जाएगा। जवाब में धारीवाल ने व्यंग्य करते हुए कहा कि आप बैठ जाइए, सिंधी का कोटा तो पूरा हो गया।
सरकार की नीति पर सवाल
धारीवाल ने स्पष्ट किया कि वे यह तय नहीं कर रहे कि शिलालेख सही है या गलत, क्योंकि ऐतिहासिक धरोहरों को गलत नहीं कहा जा सकता। लेकिन उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार मुगल इतिहास को हटाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है, तो फिर अकबर की प्रशंसा वाला शिलालेख क्यों बचाकर रखा गया है। सदन के बाहर भी इस बयान को लेकर चर्चा होती रही और अकबर से “रिश्तेदारी” के अर्थ पर तरह-तरह के कयास लगाए गए।