बाड़मेर सम्मान विवाद गरमाया, विधायक ऋतु बनावत के विरोध और दिनेश मांजू के बयान से मामला बढ़ा

बाड़मेर में गणतंत्र दिवस सम्मान विवाद गहराया, निर्दलीय विधायक के विरोध व दिनेश मांजू के बयान से मामला तूल पकड़ता दिखा।

Jan 31, 2026 - 10:56
बाड़मेर सम्मान विवाद गरमाया, विधायक ऋतु बनावत के विरोध और दिनेश मांजू के बयान से मामला बढ़ा

बाड़मेर में गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित सम्मान समारोह से जुड़ा विवाद लगातार गहराता जा रहा है. यह विवाद तब शुरू हुआ जब जिला प्रशासन ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय दिनेश मांजू को सम्मानित किया। सम्मान मिलने के तुरंत बाद इस पर सवाल उठने लगे और मामला राजनीतिक रंग लेने लगा।

विधायक ऋतु बानावत ने जताया कड़ा विरोध

उन्हें सम्मानित किए जाने के बाद बयाना से निर्दलीय विधायक ऋतु बानावत ने इसका विरोध करते हुए विधानसभा के बाहर कहा था कि “एक विधायक का डीपफेक से अश्लील वीडियो बनाने वाले व्यक्ति को यदि जिला प्रशासन सम्मानित करता है, तो यह बेहद निंदनीय है।” इसके अलावा उन्होंने कहा कि इस तरह के कृत्य के द्वारा महिला विधायक की छवि को धूमिल करने वाले को यदि जिला स्तर पर सम्मानित किया जाता है तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और साथ ही इससे इस बात का अंदाजा भी लगाया जा सकता है कि आम महिलाओं की सुरक्षा व सम्मान की स्थिति कितनी चिंताजनक है.

जिला प्रशासन ने वापस लिया सम्मान

उन्होंने इस पूरे मुद्दे को लगातार मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से मुखरता से उठाया जिसका नतीजा यह हुआ है कि बाड़मेर जिला कलेक्टर टीना डाबी को स्पष्टीकरण देते हुए सम्मान वापस लेना पड़ा. बाड़मेर जिला प्रशासन ने इस स्पष्टीकरण देते हुए बताया कि “दिनेश मांजू के विरुद्ध पुलिस थाना बयाना में मुकदमा दर्ज होने के कारण उन्हें प्रदत्त जिला स्तरीय सम्मान व प्रशस्ति पत्र वापस लिया जाता है।”

दिनेश मांजू ने दी अपनी प्रतिक्रिया 

अब इस पूरे मामले में दिनेश मांजू की प्रतिक्रिया भी सामने आई है जिससे यह मामला एक बार फिर तूल पकड़ता हुआ नज़र आ रहा है. दिनेश मांजू ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए कहा कि वन्यजीवों और पेड़-पौधों का संरक्षण किसी सम्मान की अपेक्षा से नहीं, बल्कि यह उनके धर्म और संस्कारों का हिस्सा है, जो उनके डीएनए में रचा-बसा है। साथ ही उन्होंने कहा कि गुरु महाराज जंभेश्वर भगवान द्वारा दिए गए मूल्यों का पालन वे पहले भी करते आए हैं और आज भी कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने आगामी 2 फरवरी को बीकानेर में आयोजित ‘खेजड़ी बचाओ आंदोलन’ में शामिल होने का आह्वान किया।

इस पूरे मामले को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। कुछ लोग प्रशासन के कदम का समर्थन कर रहे हैं, तो कुछ इसे राजनीतिक विवाद बता रहे हैं। फिलहाल, यह मामला रुकने के बजाय लगातार नए मोड़ ले रहा है।