बाड़मेर–बालोतरा सीमा फेरबदल पर बवाल, हेमाराम चौधरी का आज धरने पर तीसरा दिन

बाड़मेर और बालोतरा जिलों की सीमाओं में बदलाव के बाद हेमाराम चौधरी धरने पर, बोले– जनता ही असली पॉवर सेंटर

Jan 6, 2026 - 10:37
बाड़मेर–बालोतरा सीमा फेरबदल पर बवाल, हेमाराम चौधरी का आज धरने पर तीसरा दिन

राजस्थान सरकार द्वारा बाड़मेर और बालोतरा जिलों की प्रशासनिक सीमाओं में किए गए बड़े फेरबदल ने पश्चिमी राजस्थान की राजनीति और प्रशासन, दोनों में हलचल पैदा कर दी है। 31 दिसंबर को जारी आधिकारिक अधिसूचना के बाद न केवल जिलों की सीमाएं बदली हैं, बल्कि इसका सीधा असर स्थानीय जनता, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक ढांचे पर भी पड़ा है। इस निर्णय को लेकर जहां सरकार इसे प्रशासनिक सुविधा से जोड़ रही है, वहीं विरोध के स्वर भी तेज होते जा रहे हैं।

31 दिसंबर को जारी हुई अधिसूचना

राज्य सरकार ने 31 दिसंबर को अधिसूचना जारी कर बाड़मेर और नवगठित बालोतरा जिले की सीमाओं में बदलाव को अंतिम रूप दिया। इस आदेश के तहत बायतु उपखंड को दो साल बाद फिर से बाड़मेर जिले में शामिल किया गया है, जबकि गुड़ामालानी और धोरीमन्ना उपखंडों को बालोतरा जिले में जोड़ दिया गया है। इस बदलाव के बाद दोनों जिलों की प्रशासनिक संरचना पूरी तरह बदल गई है।

बायतु उपखंड की दोबारा बाड़मेर में वापसी

नोटिफिकेशन के अनुसार बायतु विधानसभा क्षेत्र के प्रशासनिक स्वरूप में आंशिक बदलाव किया गया है। पहले बायतु विधानसभा क्षेत्र में गिड़ा, पाटोदी और बायतु तहसील शामिल थीं। नए आदेश में गिड़ा और पाटोदी तहसील को बालोतरा जिले में यथावत रखा गया है, जबकि बायतु तहसील को पुनः बाड़मेर जिले में शामिल कर दिया गया है। यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि दो साल पहले ही बायतु को बाड़मेर से अलग कर दिया गया था।

गुड़ामालानी और धोरीमन्ना बालोतरा जिले में शामिल

सरकार के फैसले के अनुसार बाड़मेर जिले के दो प्रमुख उपखंड—गुड़ामालानी और धोरीमन्ना—अब बालोतरा जिले का हिस्सा होंगे। इससे पहले ये दोनों उपखंड बाड़मेर के प्रशासनिक ढांचे में शामिल थे। इस सीमा परिवर्तन के बाद बालोतरा जिले का क्षेत्रफल और प्रशासनिक दायरा बढ़ गया है। सरकार का दावा है कि इस पुनर्गठन से प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी और जनता को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।

फैसले पर शुरू हुआ राजनीतिक विरोध

सरकारी निर्णय के तुरंत बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आने लगी। गुड़ामालानी और धोरीमन्ना को बालोतरा जिले में शामिल किए जाने के विरोध में 75 वर्षीय पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी धरने पर बैठ गए हैं। उन्होंने इस फैसले को राजनीतिक बताते हुए तीखा विरोध जताया है। उनका कहना है कि यह निर्णय जनता की भावनाओं के खिलाफ है और इससे क्षेत्र की जनता को परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

हेमाराम चौधरी के तीखे बयान

धरने पर बैठे पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी ने कहा, “जिंदा रहूंगा तो देखकर जाऊंगा, वरना जनता देखेगी। मरते दम तक धरना जारी रहेगा।” उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि अभी इसे “बढ़िया” कहा जा रहा है, लेकिन यह सच में कितना सही है, यह समय बताएगा।उन्होंने आगे कहा कि जब तक उनके शरीर में सांस है, तब तक वे इस फैसले के खिलाफ लड़ते रहेंगे। चौधरी ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अगर सब कुछ इनके हाथ में होता तो ये बाड़मेर-बालोतरा को पाकिस्तान में भी डाल देते।

जनता को असली पॉवर सेंटर बताया

बिना किसी का नाम लिए हेमाराम चौधरी ने कहा कि असली पॉवर सेंटर जनता है और तीन साल बाद सत्ता को जनता के दरबार में हाजिरी लगानी पड़ेगी। उनका कहना है कि राजनीतिक कारणों से लिए गए इस निर्णय से गुड़ामालानी और धोरीमन्ना की जनता त्रस्त है और कष्ट का अनुभव कर रही है।उन्होंने यह भी कहा कि वे पहले भी अपनी ही सरकार के खिलाफ खड़े हुए हैं और मौजूदा सरकार के खिलाफ लड़ने में उन्हें कोई हिचक नहीं है। चौधरी ने दो टूक कहा कि वे मजबूती के साथ जनता के साथ खड़े रहेंगे।

प्रशासनिक फैसला, राजनीतिक असर

बाड़मेर और बालोतरा जिलों के इस पुनर्गठन को लेकर सरकार भले ही इसे प्रशासनिक सुधार बता रही हो, लेकिन ज़मीनी स्तर पर इसका राजनीतिक असर साफ नजर आने लगा है। आने वाले दिनों में यह फैसला किस दिशा में जाता है और जनता की प्रतिक्रिया क्या रहती है, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।