रोस्टर–OMR घोटाले पर बाड़मेर में युवाओं का आक्रोश, भर्ती पारदर्शिता की उठी मांग

रोस्टर व OMR घोटाले के विरोध में बाड़मेर में युवाओं का धरना, निष्पक्ष जांच और पारदर्शी भर्ती की मांग तेज

Jan 27, 2026 - 16:47
रोस्टर–OMR घोटाले पर बाड़मेर में युवाओं का आक्रोश, भर्ती पारदर्शिता की उठी मांग

प्रदेश में भर्ती परीक्षाओं को लेकर लगातार सामने आ रही अनियमितताओं के खिलाफ युवाओं का आक्रोश अब सड़कों पर साफ दिखाई देने लगा है। रोस्टर व्यवस्था और OMR शीट से जुड़े कथित घोटालों के विरोध में बाड़मेर में आयोजित धरने में बड़ी संख्या में बेरोज़गार युवा शामिल हुए। इस धरने में बायतु विधायक श्री हरीश चौधरी भी मौजूद रहे और उन्होंने युवाओं की मांगों का समर्थन करते हुए सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए।धरने के दौरान युवाओं ने आरोप लगाया कि भर्ती प्रक्रियाओं में जानबूझकर ऐसी खामियां रखी जा रही हैं, जिससे योग्य उम्मीदवारों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनका कहना था कि यह सिर्फ प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि मेहनत और भविष्य के साथ किया गया अन्याय है।

 

हरीश चौधरी ने किरोड़ीलाल मीणा, रविंद्र भाटी और प्रियंका चौधरी से की अपील 

प्रदर्शन के दौरान बायतु विधायक एवं मध्यप्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने युवाओं को संबोधित किया। उन्होंने मंत्री करोड़ी लाल का नाम लेते हुए कहा कि वे हमेशा युवाओं के हक़ की बात करते रहे हैं, इसलिए अब उन्हें “लालच छोड़कर युवाओं के साथ खड़ा होना चाहिए।” हरीश चौधरी ने कहा कि यह लड़ाई किसी दल की नहीं, बल्कि भविष्य के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ है।हरीश चौधरी ने अपने संबोधन में बाड़मेर विधायक डॉ. प्रियंका चौधरी और शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी से भी अपील की। उन्होंने कहा कि आप दोनों पर कोई पाबंदी नहीं है, इसलिए इन युवाओं के साथ खुलकर खड़े हों। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह सरकार युवाओं को कुछ देने वाली नहीं है।

युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप

धरने को संबोधित करते हुए विधायक हरीश चौधरी ने कहा कि रोस्टर व्यवस्था में गड़बड़ी, OMR शीट से जुड़े मामले और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी यह साबित करती है कि व्यवस्था युवाओं के प्रति संवेदनशील नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्षों तक कड़ी मेहनत करने वाले युवाओं के सपनों पर सीधा प्रहार किया जा रहा है, जिसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जा सकता।उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक दोषियों की जवाबदेही तय नहीं होती, निष्पक्ष जांच नहीं होती और भर्ती प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी नहीं बनाया जाता, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।

सड़कों पर उतरा प्रदेश का युवा

बाड़मेर के साथ-साथ नागौर से भी विरोध प्रदर्शन की तस्वीरें सामने आई हैं। इन प्रदर्शनों में शामिल युवाओं का कहना है कि वे अपने हक और अधिकारों के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं। कई युवाओं ने बताया कि गांवों में गहने गिरवी रखकर, सीमित संसाधनों में पढ़ाई करके वे परीक्षा की तैयारी करते हैं, लेकिन जब परिणाम सामने आते हैं तो उन्हें अन्याय का सामना करना पड़ता है।युवाओं का आरोप है कि आरक्षण में विसंगतियां, रोस्टर प्रणाली की खामियां, नॉर्मलाइजेशन की गड़बड़ियां और पेपर लीक जैसे मामले बार-बार सामने आ रहे हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।

सदन तक पहुंचे युवाओं के मुद्दे

धरने में वक्ताओं ने कहा कि अब समय आ गया है कि ये मुद्दे सिर्फ सड़कों तक सीमित न रहें, बल्कि विधानसभा और संसद तक गूंजें। युवाओं ने मांग की कि परीक्षा प्रणालियों में पूर्ण पारदर्शिता लाई जाए और पेपर लीक या भर्ती घोटालों में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। विधायक हरीश चौधरी ने कहा कि सरकार का नेतृत्व चाहे किसी भी दल के पास हो, युवाओं के सपनों से खेलने वालों को बेनकाब किया जाना चाहिए। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने मुद्दों को मजबूती से उठाते रहें और समाधान मिलने तक संघर्ष जारी रखें।

संविधान से ऊपर कोई नहीं

धरने के दौरान यह भी कहा गया कि चाहे आरोपी कितना भी ताकतवर क्यों न हो, वह भारत के संविधान से बड़ा नहीं हो सकता। यदि जांच में आरोप साबित होते हैं, तो दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाना चाहिए। वक्ताओं ने कहा कि यदि प्रदेश में एक भी अयोग्य व्यक्ति नौकरी कर रहा है, तो वह मेहनत से तैयारी कर रहे हजारों युवाओं के साथ अन्याय है।

आंदोलन जारी रखने का ऐलान

अंत में युवाओं ने साफ किया कि यह लड़ाई किसी एक परीक्षा या भर्ती की नहीं है, बल्कि युवाओं के सम्मान, अधिकार और भविष्य की है। जब तक व्यवस्था में सुधार नहीं होता और दोषियों को सजा नहीं मिलती, तब तक यह आंदोलन थमने वाला नहीं है।