हनुमान बेनीवाल और रवींद्र भाटी आए एक साथ; मुद्दा बना बीकानेर का 'खेजड़ी बचाओ आंदोलन'।
बीकानेर में खेजड़ी बचाओ संघर्ष तेज। रवींद्र सिंह भाटी और सांसद हनुमान बेनीवाल ने कहा– खेजड़ी राजस्थान की धरोहर, कटाई रोकना जरूरी।
बीकानेर में ‘खेजड़ी बचाओ संघर्ष समिति’ द्वारा आयोजित बड़े प्रदर्शन में कल शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी शामिल होंगे। खेजड़ी पेड़ों की तेजी से हो रही कटाई को रोकने के लिए स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों द्वारा यह आंदोलन लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है। रविंद्र भाटी की उपस्थिति से इस जनआंदोलन को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
हनुमान बेनीवाल ने भी दिया समर्थन
आज सुबह संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों ने बीकानेर एयरपोर्ट पर नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने खेजड़ी संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर बेनीवाल से चर्चा की, जिस पर उन्होंने अपना स्पष्ट समर्थन व्यक्त किया। दिलचस्प बात यह है कि बहुत कम मौकों पर हनुमान बेनीवाल और रवींद्र सिंह भाटी किसी एक मुद्दे पर एक साथ नजर आते हैं। इस मुद्दे ने दोनों नेताओं को एक प्लेटफॉर्म पर ला दिया है, जिससे आंदोलन की ताकत और बढ़ गई है।
इस मुलाकात के दौरान सांसद हनुमान बेनीवाल ने कहा, - “मैंने लोकसभा में पूर्व में भी खेजड़ी को बचाने की मांग उठाई है। केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री से भी व्यक्तिगत रूपसे इस विषय पर चर्चा कर चुका हूं। आने वाले दिनों में सदन में पुनः यह मुद्दा उठाऊंगा। खेजड़ी हमारी राजस्थान की धरोहर है और इसेबचाने के लिए आरएलपी सड़क से संसद तक संघर्ष करेगी।”
राजस्थान में खेजड़ी बचाओ बना बड़ा जनआंदोलन
#खेजड़ी_बचाओ अब पूरे राजस्थान में एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले चुका है। सोलर कंपनियों द्वारा लगातार खेजड़ी के पेड़ों की कटाई को लेकर स्थानीय लोग चिंतित हैं, क्योंकि यह कदम भविष्य में जैव विविधता, पर्यावरण और पशुधन पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। इसी बीच, जैसलमेर क्षेत्र से भी खेजड़ी और गोचर भूमि की रक्षा के लिए एक दल पिछले कई दिनों से तनोट माता मंदिर से जयपुर की ओर पदयात्रा कर रहा है।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम
खेजड़ी पेड़ राजस्थान की शुष्क भूमि का आधार माना जाता है। इसकी कटाई सिर्फ पर्यावरण को नहीं, बल्कि स्थानीय जीवन, पशुपालन और पारंपरिक संस्कृति को भी प्रभावित करती है। ऐसे में संघर्ष समिति द्वारा चलाया जा रहा यह आंदोलन प्रदेश की पर्यावरणीय चिंता को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।