अश्लील और गैर-कानूनी कंटेंट पर सख्त हुआ केंद्र, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को चेतावनी
केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया और इंटरनेट प्लेटफॉर्म्स को अश्लील, पोर्नोग्राफिक और बच्चों से जुड़े यौन शोषण वाले कंटेंट को लेकर सख्त चेतावनी दी है। सरकार ने कहा है कि आईटी एक्ट और आईटी नियम 2021 का पालन न करने पर प्लेटफॉर्म्स और यूज़र्स के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सोशल मीडिया इंटरमीडियरी को गैर-कानूनी कंटेंट की पहचान, रिपोर्टिंग और उसे तुरंत हटाने की जिम्मेदारी निभानी होगी। नियमों का उल्लंघन होने पर आईटी एक्ट, भारतीय न्याय संहिता सहित अन्य आपराधिक कानूनों के तहत मुकदमा दर्ज किया जा सकता है।
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने सभी सोशल मीडिया और इंटरनेट प्लेटफॉर्म्स को अश्लील, पोर्नोग्राफिक और बच्चों से जुड़े यौन शोषण वाले कंटेंट को लेकर सख्त चेतावनी जारी की है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि आईटी एक्ट और आईटी नियम, 2021 का पालन नहीं किया गया तो संबंधित प्लेटफॉर्म्स और यूज़र्स के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सरकार की ओर से जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि सोशल मीडिया इंटरमीडियरी, डिजिटल प्लेटफॉर्म और उनके यूज़र्स आईटी एक्ट, भारतीय न्याय संहिता (BNS) और अन्य संबंधित आपराधिक कानूनों के तहत कानूनी रूप से जिम्मेदार हैं। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा सकता है।
एडवाइजरी में इस बात पर जोर दिया गया है कि इंटरमीडियरी को अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद कंटेंट को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी। खास तौर पर ऐसे कंटेंट की पहचान, रिपोर्टिंग और समय पर हटाने की जिम्मेदारी प्लेटफॉर्म्स की होगी, जिन्हें अश्लील, गैर-कानूनी या बच्चों के लिए हानिकारक माना जाता है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने सोशल मीडिया कंपनियों को याद दिलाया है कि आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत उन्हें तभी कानूनी सुरक्षा मिल सकती है, जब वे उचित सावधानी बरतें और गैर-कानूनी कंटेंट को रोकने के लिए सक्रिय कदम उठाएं। यदि कंपनियां इस जिम्मेदारी से बचती हैं, तो उन्हें कानूनी छूट नहीं मिलेगी।
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने इंटरनेट प्लेटफॉर्म्स को अपने कंटेंट मॉडरेशन और कंप्लायंस फ्रेमवर्क की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। एडवाइजरी में यह भी कहा गया है कि कोई भी यूज़र ऐसा कंटेंट होस्ट, अपलोड, प्रकाशित, साझा या प्रसारित न करे, जो अश्लील, पोर्नोग्राफिक, बच्चों के यौन शोषण से जुड़ा, बच्चों के लिए हानिकारक या कानून के खिलाफ हो।
सरकार का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका उपयोग समाज और कानून के दायरे में रहकर किया जाए, अन्यथा सख्त कार्रवाई से कोई भी नहीं बचेगा।