राजस्थान में खेजड़ी कटाई विवाद गहराया: बीकानेर में अनशन, हरीश चौधरी का सरकार पर हमला
राजस्थान में खेजड़ी कटाई पर बड़ा विवाद, बीकानेर में आमरण अनशन जारी। विधायक हरीश चौधरी ने सरकार पर संवेदनहीनता और चर्चा से बचने का आरोप लगाया।
राजस्थान के पश्चिमी मरुस्थल की पहचान मानी जाने वाली खेजड़ी की भारी मात्रा में हो रही कटाई पर प्रदेश में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। बीकानेर में पिछले तीन दिनों से 450 से अधिक लोग आमरण अनशन पर बैठे हैं। इनमें साधु-संत, बुजुर्ग, महिलाएँ और बच्चे भी शामिल हैं। प्रदर्शनकारी खेजड़ी को बचाने और बड़े पैमाने पर हो रही अवैध कटाई को रोकने की मांग कर रहे हैं। हालांकि अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
हरीश चौधरी ने विधानसभा में उठाया मुद्दा
बायतु विधायक एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश चौधरी पिछले तीन दिनों से इस विषय पर लगातार विधानसभा का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने खेजड़ी संरक्षण और बीकानेर में चल रहे अनशन को लेकर स्थगन प्रस्ताव भी दिया, लेकिन सदन में इस मुद्दे पर चर्चा की अनुमति नहीं मिली। चौधरी ने इसे लोकतंत्र के लिए चिंताजनक बताते हुए कहा कि राज्य वृक्ष की कटाई और जनता के आंदोलन जैसे गंभीर विषयों पर चर्चा से इनकार करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
“सरकार खेजड़ी पर चर्चा तक से डर रही है” — हरीश चौधरी
हरीश चौधरी ने आरोप लगाया कि खेजड़ी कटाई के मामले में राज्य सरकार संवेदनहीन बनी हुई है। उनका कहना है कि कंपनियाँ प्रति पेड़ 30,000 रुपये तक देकर खेजड़ी कटवा रही हैं, लेकिन यह पैसा किसे दिया जा रहा है और इस अवैध गतिविधि में कौन शामिल है, इसकी कोई जांच नहीं की जा रही। उन्होंने कहा कि राजस्थान की पहचान उसका रेगिस्तान है और उसका अस्तित्व खेजड़ी से है। ऐसे में राज्य सरकार का मौन रहना समझ से परे है।
ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व का प्रतीक है खेजड़ी
हरीश चौधरी ने कहा कि खेजड़ी केवल पेड़ नहीं, बल्कि पश्चिमी राजस्थान के जीवन का आधार है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पशुपालन और पर्यावरणीय संतुलन में इसका अहम योगदान है। 1730 के खेजड़ली आंदोलन का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि खेजड़ी को बचाने के लिए लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी, जो इसे पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक बनाता है।
कटाई से बढ़ेगा मरुस्थल का तापमान, वन्यजीवों पर भी संकट
चौधरी ने चेतावनी दी कि अगर खेजड़ी की कटाई इसी तरह जारी रही तो मरुस्थल का तापमान 2–3 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। इसके गंभीर दुष्परिणाम पशु-पक्षियों, हिरणों और अन्य वन्यजीवों पर पड़ेंगे। खेजड़ी के खत्म होने से मिट्टी का कटाव बढ़ेगा और भूजल भी प्रभावित होगा, जिससे मरुस्थलीय क्षेत्र की जीवनशैली पर गहरा असर पड़ेगा। विधायक चौधरी ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी जाति या राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि पूरे राजस्थान के भविष्य का सवाल है। उन्होंने कहा कि खेजड़ी पश्चिमी राजस्थान के पारिस्थितिक तंत्र की रीढ़ है। इसके संरक्षण के बिना ग्रामीण आजीविका और पर्यावरण दोनों संकट में पड़ जाएंगे।
ट्री प्रोटेक्शन एक्ट की मांग
हरीश चौधरी ने सरकार से मांग की कि खेजड़ी समेत सभी देशी वृक्षों की सुरक्षा के लिए एक सख्त “ट्री प्रोटेक्शन एक्ट” लाया जाए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है। साथ ही उन्होंने बीकानेर में आमरण अनशन पर बैठे लोगों की सुरक्षा और स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने की अपील की। अंत में चौधरी ने कहा कि खेजड़ी राजस्थान के भविष्य की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है। समय रहते सरकार ने निर्णय नहीं लिया तो आने वाली पीढ़ियों को इसका बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पेड़ बचेंगे तभी प्रदेश बचेगा, और इस लड़ाई को जनता के साथ मिलकर मजबूती से आगे बढ़ाया जाएगा।