बीजेपी छोड़ने के बयान पर सस्पेंस, महेंद्रजीत मालवीया और संगठन में टकराव

महेंद्रजीत मालवीया के बीजेपी छोड़ने के बयान पर विवाद, प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने किया इनकार

Jan 12, 2026 - 17:16
बीजेपी छोड़ने के बयान पर सस्पेंस, महेंद्रजीत मालवीया और संगठन में टकराव

वागड़ क्षेत्र के दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीया के भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) छोड़ने के बयान ने राजस्थान की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। रविवार को मीडिया से बातचीत में मालवीया ने पार्टी से अलग होने की घोषणा करते हुए संगठन में “दम घुटने” जैसी बात कही थी। हालांकि, इस बयान के करीब 24 घंटे बाद बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने इससे इनकार करते हुए कहा कि उन्हें ऐसी किसी जानकारी की जानकारी नहीं है।

पार्टी छोड़ने के बयान पर संगठन की प्रतिक्रिया

बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने एनडीटीवी राजस्थान से बातचीत में कहा कि उनकी महेंद्रजीत मालवीया से नियमित बातचीत होती रहती है और पार्टी छोड़ने जैसी कोई बात उनके संज्ञान में नहीं आई है। राठौड़ ने कहा कि अगर ऐसा कोई फैसला होता, तो संगठन को इसकी औपचारिक जानकारी जरूर मिलती। ऐसे में संगठन और मालवीया के बयानों में विरोधाभास सामने आ रहा है, जिससे राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

मालवीया ने क्यों जताई नाराजगी

मीडिया के सामने बयान देते हुए महेंद्रजीत सिंह मालवीया ने कहा था कि उनकी इच्छा थी कि उनके द्वारा शुरू किए गए विकास कार्य रुकें नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी “डबल इंजन सरकार” का नारा देती है, लेकिन पार्टी का माहौल उन्हें रास नहीं आया। मालवीया के अनुसार, पार्टी में उनकी बातों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा था, जिससे वे असहज महसूस कर रहे थे।

बीएपी और सत्ता को लेकर बयान

भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) को लेकर पूछे गए सवाल पर मालवीया ने कहा था कि विकास वही कर सकता है, जो सत्ता में हो। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि आने वाले 100 साल में भी बीएपी सत्ता में नहीं आ सकती, इसलिए सरकार का साथ लेना जरूरी है। इस बयान को राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है, क्योंकि वागड़ क्षेत्र में आदिवासी राजनीति का खास प्रभाव है।

लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी में हुए थे शामिल

महेंद्रजीत सिंह मालवीया ने लोकसभा चुनाव से ठीक पहले बीजेपी का दामन थामा था। उन्होंने बीजेपी के टिकट पर चुनाव भी लड़ा, लेकिन उन्हें बीएपी नेता राजकुमार रोत के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा। चुनाव के दौरान मालवीया ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों से प्रभावित होकर वे बीजेपी में शामिल हुए हैं।

विपक्ष के आरोप और विवाद

चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस और बीएपी नेताओं ने आरोप लगाए थे कि महेंद्रजीत मालवीया ने ईडी की कार्रवाई के डर से बीजेपी जॉइन की थी। हालांकि मालवीया ने इन आरोपों को खारिज किया था और कहा था कि उनका फैसला पूरी तरह राजनीतिक विचारधारा और विकास की सोच पर आधारित है।

बयान और इनकार के बीच बढ़ता सस्पेंस

मालवीया द्वारा खुले तौर पर पार्टी छोड़ने की घोषणा और उसके बाद बीजेपी संगठन का इनकार, दोनों ही बातें कई सवाल खड़े कर रही हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि या तो संगठन के भीतर संवाद की कमी है या फिर आने वाले दिनों में कोई बड़ा राजनीतिक फैसला सामने आ सकता है।

वागड़ की राजनीति पर असर

महेंद्रजीत सिंह मालवीया वागड़ क्षेत्र के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। उनके किसी भी बड़े राजनीतिक कदम का असर स्थानीय राजनीति पर पड़ना तय माना जा रहा है। फिलहाल, उनके बयान और संगठन की प्रतिक्रिया के बीच बना यह सस्पेंस राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बना हुआ है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि मालवीया का अगला कदम क्या होगा और इसका बीजेपी व वागड़ की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ेगा।