भाजपा छोड़ कांग्रेस में लौटे मालवीया, 64 घंटे में एसीबी की एंट्री से सियासत गरमाई

भाजपा से कांग्रेस में लौटते ही पूर्व मंत्री मालवीया के ठिकानों पर एसीबी की कार्रवाई, राजनीति में बढ़ा तनाव।

Jan 14, 2026 - 11:55
भाजपा छोड़ कांग्रेस में लौटे मालवीया, 64 घंटे में एसीबी की एंट्री से सियासत गरमाई

राजस्थान की राजनीति में इन दिनों जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है। बांसवाड़ा से जुड़ा एक मामला अचानक प्रदेश की सियासत के केंद्र में आ गया है। पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीया के भाजपा छोड़कर कांग्रेस में लौटने के कुछ ही घंटों बाद उनके घर और उनसे जुड़े ठिकानों पर एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की कार्रवाई ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

64 घंटे में बदला राजनीतिक घटनाक्रम

पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीया ने हाल ही में भाजपा छोड़कर कांग्रेस में वापसी की घोषणा की थी। यह फैसला ऐसे समय में आया जब वे जयपुर में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर चुके थे। भाजपा से अलग होने और कांग्रेस में शामिल होने के करीब 64 घंटे के भीतर ही एसीबी की टीम उनके बांसवाड़ा स्थित घर पहुंच गई। इस तेज घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को और तेज कर दिया।

पेट्रोल पंप और केशर प्लांट पर सर्च

एसीबी की टीम ने पूर्व मंत्री मालवीया के परिवार से जुड़े ठिकानों पर कार्रवाई की। जानकारी के अनुसार, टीम सबसे पहले एक पेट्रोल पंप और उसके बाद एक केशर (क्रेशर) प्लांट पर पहुंची। वहां दस्तावेजों की जांच की गई और संबंधित रिकॉर्ड खंगाले गए। इसके बाद टीम बांसवाड़ा जिले के आनंदपुरी क्षेत्र में स्थित मालवीया के आवास पर पहुंची।

घर के बाहर जुटे समर्थक

जैसे ही एसीबी की कार्रवाई की खबर फैली, बड़ी संख्या में कांग्रेस समर्थक और स्थानीय लोग मालवीया के घर के बाहर इकट्ठा हो गए। समर्थकों ने कांग्रेस का झंडा लहराया और कार्रवाई को राजनीतिक दबाव का परिणाम बताया। मौके पर मौजूद लोगों का कहना था कि राजनीतिक दल बदलने के बाद इस तरह की जांच संदेह पैदा करती है।

मालवीया का बयान: मुझ पर दबाव बनाया जा रहा

पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीया ने एसीबी की कार्रवाई को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह पूरी कार्रवाई उन्हें दबाव में लाने के उद्देश्य से की जा रही है। मालवीया का कहना है कि जिन पेट्रोल पंप और केशर प्लांट की जांच की गई, वहां सभी नियमों के अनुसार काम होता है और नियमित जांच पहले भी हो चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी भी दबाव से डरने वाले नहीं हैं।

कांग्रेस का आरोप: राजनीतिक बदले की भावना

कांग्रेस नेताओं ने इस कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया है। प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व का कहना है कि जैसे ही मालवीया ने कांग्रेस में लौटने का फैसला किया, वैसे ही जांच एजेंसियां सक्रिय हो गईं। कांग्रेस का आरोप है कि यह कार्रवाई राजनीतिक दबाव बनाने और विपक्षी नेताओं को डराने की कोशिश है।

भाजपा का पक्ष: जांच एजेंसियां स्वतंत्र

वहीं भाजपा की ओर से कहा गया है कि एसीबी एक स्वतंत्र एजेंसी है और वह किसी राजनीतिक दबाव में काम नहीं करती। भाजपा नेताओं का कहना है कि यदि शिकायत के आधार पर जांच हो रही है, तो इसमें राजनीति को नहीं घसीटना चाहिए। उनके अनुसार, कानून अपना काम कर रहा है।

सियासी माहौल और तेज होने की संभावना

इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजस्थान की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो गया है। आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रकरण न केवल बांसवाड़ा बल्कि पूरे प्रदेश की राजनीति पर असर डाल सकता है।