मुनाबाव बॉर्डर पर जवानों ने किया मानवेंद्र सिंह जसोल का सम्मान, सरहद समृद्धि यात्रा चर्चा में

मुनाबाव बॉर्डर पर सरहद समृद्धि यात्रा के दौरान जवानों ने मानवेंद्र सिंह जसोल का सम्मान किया, यात्रा को मिला नया संदेश

Dec 30, 2025 - 14:38
मुनाबाव बॉर्डर पर जवानों ने किया मानवेंद्र सिंह जसोल का सम्मान, सरहद समृद्धि यात्रा चर्चा में

भारत-पाक सीमा से सटे मुनाबाव बॉर्डर पर सरहद समृद्धि यात्रा के दौरान एक भावनात्मक और प्रेरक दृश्य देखने को मिला। बॉर्डर स्थित एफटीएस मुनाबाह पर मराठा बटालियन के जवानों ने कर्नल मानवेंद्र सिंह जसोल का गर्मजोशी से स्वागत किया। सीमाओं की रक्षा में तैनात जवानों द्वारा किया गया यह सम्मान यात्रा के लिए खास बन गया और पूरे क्षेत्र में इसकी चर्चा होने लगी। यह स्वागत केवल औपचारिक नहीं था, बल्कि इसमें देश, सीमा और समाज के प्रति साझा भावनाओं की झलक साफ दिखाई दी। जवानों और नागरिक पहल के बीच बने इस जुड़ाव ने यह संदेश दिया कि सरहद समृद्धि यात्रा का असर सीमावर्ती इलाकों तक गहराई से पहुंच रहा है।

सरहद पर सम्मान, यात्रा को मिला नया भावनात्मक आयाम

मुनाबाव बॉर्डर पर जब कर्नल मानवेंद्र सिंह जसोल का स्वागत किया गया, तो माहौल देशभक्ति और अपनत्व से भरा नजर आया। मराठा बटालियन के जवानों ने जिस आत्मीयता से यात्रा का स्वागत किया, उसने यह स्पष्ट किया कि सीमाओं पर तैनात सैनिक भी इस पहल से खुद को जुड़ा हुआ महसूस कर रहे हैं।इस सम्मान ने यात्रा को एक नया भावनात्मक आयाम दिया। आमतौर पर सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास और संवाद की बातें कम पहुंच पाती हैं, लेकिन इस यात्रा ने उस दूरी को कम करने का काम किया है।

यात्रा की शुरुआत से ही चर्चा में

कर्नल मानवेंद्र सिंह जसोल द्वारा शुरू की गई सरहद समृद्धि यात्रा शुरुआत से ही चर्चा का विषय बनी हुई है। शरद क्षेत्रों से गुजर रही इस यात्रा को हर पड़ाव पर लोगों का समर्थन और सहयोग मिल रहा है। गांव-ढाणियों से लेकर कस्बों तक लोग उत्साह के साथ यात्रा का स्वागत कर रहे हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि यह यात्रा केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि संवाद का माध्यम बन रही है। लोग इसे क्षेत्र के विकास, आपसी समझ और सामाजिक एकता से जोड़कर देख रहे हैं।

आमजन का समर्थन और सहभागिता

यात्रा की एक खास बात यह है कि इसे आम लोगों का भरपूर प्यार मिल रहा है। रास्ते में जगह-जगह स्वागत सभाएं आयोजित की जा रही हैं। लोग फूल-मालाओं से अतिथियों का स्वागत कर रहे हैं और खुलकर अपनी बात रख रहे हैं।ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इस यात्रा को उम्मीद के रूप में देख रहे हैं। उनका मानना है कि ऐसे प्रयासों से सीमावर्ती इलाकों की समस्याएं सामने आएंगी और समाधान की दिशा में कदम बढ़ेंगे।

सामाजिक समरसता की मिसाल

सरहद समृद्धि यात्रा को समाज के हर वर्ग का सहयोग मिल रहा है। खास बात यह है कि गैर-हिंदू समुदायों के लोगों ने भी आगे बढ़कर यात्रा का स्वागत किया। उन्होंने भाईचारे और आपसी सौहार्द का संदेश दिया।यह दृश्य यह बताता है कि यात्रा किसी एक वर्ग या समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी को साथ लेकर चलने की भावना पर आधारित है। संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से लोग एक-दूसरे को समझने और जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं।

विश्वास और विकास का संदेश

मुनाबाव बॉर्डर पर जवानों द्वारा किया गया सम्मान इस बात का संकेत है कि सरहद समृद्धि यात्रा अब केवल एक यात्रा नहीं रही। यह विश्वास, एकता और विकास का संदेश लेकर आगे बढ़ रही एक व्यापक पहल बन चुकी है।

सीमावर्ती क्षेत्रों में इस तरह के प्रयास न केवल लोगों का मनोबल बढ़ाते हैं, बल्कि देश की एकता को भी मजबूत करते हैं। मुनाबाव बॉर्डर पर मिला यह सम्मान सरहद समृद्धि यात्रा के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है, जिसने इसके उद्देश्य और संदेश को और अधिक मजबूत किया है।