मेवाड़ राजपरिवार में नया मोड़: अरविंद सिंह मेवाड़ की वसीयत पर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, सभी मामले दिल्ली हाईकोर्ट ट्रांसफर
उदयपुर के मेवाड़ पूर्व राजपरिवार की अरबों रुपये की संपत्ति को लेकर दशकों पुराना विवाद अब नई पीढ़ी तक पहुंच गया है। मार्च 2025 में अरविंद सिंह मेवाड़ के निधन के बाद उनकी वसीयत की वैधता को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है।
उदयपुर के पूर्व मेवाड़ राजपरिवार की अरबों रुपये की संपत्ति को लेकर चल रहा लंबा विवाद अब एक नए चरण में पहुंच गया है। मार्च 2025 में अरविंद सिंह मेवाड़ के निधन के बाद उनकी वसीयत की वैधता को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। यह विवाद मुख्य रूप से उनके बेटे लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ और बेटी पद्मजा कुमारी परमार के बीच है, जिसमें सिटी पैलेस, एचआरएच ग्रुप ऑफ होटल्स और अन्य पैतृक संपत्तियों के उत्तराधिकार का मुद्दा शामिल है।सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने मामले की पैरवी करते हुए बताया कि याचिकाकर्ता अरविंद सिंह मेवाड़ के परिवार के सदस्य हैं। कोर्ट ने सभी संबंधित मामलों को एकत्रित करने का फैसला लिया है। लक्ष्यराज सिंह ने मुंबई हाईकोर्ट में लंबित मामलों को राजस्थान हाईकोर्ट ट्रांसफर करने की मांग की थी, जबकि दूसरी पक्ष ने जोधपुर बेंच (राजस्थान हाईकोर्ट) के मामलों को बॉम्बे हाईकोर्ट भेजने का अनुरोध किया था।
सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों के सुझाव पर सभी लंबित मामलों को दिल्ली हाईकोर्ट में ट्रांसफर करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि परिवार के बीच कोई अन्य मामला लंबित है, तो उसे भी दिल्ली हाईकोर्ट में ट्रांसफर करने के लिए आवेदन किया जा सकता है। इस मामले की अगली सुनवाई जनवरी 2026 में दिल्ली हाईकोर्ट में होगी।उदयपुर सिटी पैलेस – विवाद की केंद्र बिंदु में यह ऐतिहासिक महल।अरविंद सिंह मेवाड़ (1944-2025) – एचआरएच ग्रुप के चेयरमैन और विवादित संपत्तियों के प्रमुख नियंत्रक।लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ – अरविंद सिंह के बेटे और वर्तमान में एचआरएच ग्रुप के मालिक।
विवाद की जड़ें: दशकों पुरानी कानूनी लड़ाई
यह विवाद दरअसल 1980 के दशक से चला आ रहा है, जब महाराणा भगवत सिंह मेवाड़ (अरविंद सिंह के पिता) ने परिवार की संपत्तियों को बेचने और लीज पर देने का फैसला लिया। उनके बड़े बेटे महेंद्र सिंह मेवाड़ को यह फैसला पसंद नहीं आया और उन्होंने 1983 में पिता के खिलाफ अदालत में मुकदमा दायर कर दिया।नाराज भगवत सिंह ने अपनी वसीयत में छोटे बेटे अरविंद सिंह को संपत्तियों का उत्तराधिकारी और एक्जीक्यूटर बना दिया, जबकि महेंद्र सिंह को लगभग बाहर कर दिया। भगवत सिंह के 1984 में निधन के बाद विवाद और गहरा गया।
2020 का फैसला: उदयपुर जिला अदालत ने 37 साल पुराने मामले में संपत्ति को चार हिस्सों में बांटने का आदेश दिया – एक हिस्सा भगवत सिंह के नाम और बाकी तीन हिस्से उनके तीन बच्चों (महेंद्र सिंह, अरविंद सिंह और बेटी योगेश्वरी कुमारी) में।
अधिकांश संपत्ति (शंभू निवास पैलेस, बड़ी पाल, घासघर आदि) अरविंद सिंह के कब्जे में रही। कोर्ट ने इन संपत्तियों पर व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक भी लगाई।
अरविंद सिंह ने इस फैसले को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी, जहां स्टे मिला।
महेंद्र सिंह के 2024 में निधन के बाद उनके बेटे विश्वराज सिंह मेवाड़ को परिवार का प्रतीकात्मक उत्तराधिकारी घोषित किया गया, जिससे विवाद फिर उभरा। अब अरविंद सिंह के निधन के बाद उनकी वसीयत पर नया विवाद शुरू हो गया है।