टीआरपी की राजनीति बनाम सच्चाई: रविंद्र सिंह भाटी ने स्वरूप सिंह खारा के आरोपों पर दिया तथ्यात्मक जवाब

तीन पीढ़ियों को कांग्रेसी बताने के आरोपों पर रविंद्र सिंह भाटी का स्पष्ट जवाब, बोले—मेहनत ही पहचान

Jan 3, 2026 - 14:00
टीआरपी की राजनीति बनाम सच्चाई: रविंद्र सिंह भाटी ने स्वरूप सिंह खारा के आरोपों पर दिया तथ्यात्मक जवाब

हाल के दिनों में राजनीतिक बयानबाज़ी के बीच नामों और परिवारों को लेकर लगाए जा रहे आरोपों ने सियासी माहौल को गरमा दिया है। इसी क्रम में स्वरूप सिंह खारा द्वारा रविंद्र सिंह भाटी को लेकर दिए गए बयान पर अब भाटी ने सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखा है। उन्होंने पूरे मामले पर सधे हुए और तथ्यात्मक अंदाज़ में जवाब देते हुए आरोपों को भ्रामक बताया है।

आरोप क्या हैं?

स्वरूप सिंह खारा ने हाल ही में एक बयान में दावा किया था कि रविंद्र सिंह भाटी की तीन पीढ़ियां कांग्रेस से जुड़ी रही हैं। इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर इसे लेकर तरह-तरह की बातें होने लगीं। इसी पृष्ठभूमि में भाटी ने सामने आकर इन आरोपों पर अपनी बात रखी।

टीआरपी के लिए नाम का इस्तेमाल

रविंद्र सिंह भाटी ने कहा कि कुछ लोग उनके नाम का इस्तेमाल केवल टीआरपी और सुर्खियों में बने रहने के लिए कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह के बयान सच्चाई से परे हैं और जनता को गुमराह करने की कोशिश है। भाटी के अनुसार, जब तथ्यों की जगह आरोप ले लेते हैं, तो राजनीति का स्तर गिरता है।

दादा की नौकरी पर सफाई

भाटी ने अपने परिवार के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि 1970 के दशक में बाड़मेर और जैसलमेर जैसे सीमावर्ती जिलों में सरकारी कर्मचारी बहुत कम हुआ करते थे। उस समय उनके दादा आबकारी विभाग में कार्यरत थे। यह नियुक्ति किसी राजनीतिक दबाव या प्रभाव के कारण नहीं, बल्कि उस दौर की सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत हुई थी। उन्होंने कहा कि उस समय सरकारी सेवा अपने आप में बड़ी बात मानी जाती थी।

पिता और चाचा की भूमिका

भाटी ने बताया कि उनके पिता आज भी शिक्षक के रूप में नियमित सेवा दे रहे हैं और पूरी ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे हैं। उनकी सेवा को किसी राजनीतिक चश्मे से देखना गलत है।वहीं, उनके चाचा द्वारा सरपंच का चुनाव लड़ने के मुद्दे पर भी भाटी ने स्थिति साफ की। उन्होंने कहा कि सरपंच चुनाव में किसी राजनीतिक दल के टिकट या समर्थन की आवश्यकता नहीं होती। ऐसे में इसे किसी पार्टी से जोड़ना तथ्यात्मक रूप से गलत है।

परिवार को पार्टी से जोड़ना भ्रामक

रविंद्र सिंह भाटी ने दो टूक शब्दों में कहा कि पूरे परिवार को किसी एक राजनीतिक दल से जोड़कर पेश करना भ्रामक है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आरोप न सिर्फ सच्चाई से दूर हैं, बल्कि जनता को भ्रमित करने का प्रयास भी हैं। भाटी के अनुसार, राजनीतिक बहस मुद्दों पर होनी चाहिए, न कि व्यक्तिगत जीवन या परिवार पर।

मेहनत और जनता का भरोसा ही पहचान

अपने बयान के अंत में भाटी ने कहा कि उनकी पहचान किसी राजनीतिक लेबल से नहीं, बल्कि मेहनत, ईमानदारी और जनता के भरोसे से है। उन्होंने भरोसा जताया कि जनता सच और झूठ के बीच फर्क करना जानती है। भाटी ने कहा कि वे आगे भी तथ्यों और सच्चाई के साथ जनता के सामने अपनी बात रखते रहेंगे।