शारदीय नवरात्रि 2025: कलश स्थापना में भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, वरना नाराज हो सकती हैं मां दुर्गा
शारदीय नवरात्रि 2025 आज से शुरू, कलश स्थापना के लिए दो शुभ मुहूर्त। पूजा में पांच गलतियों से बचें, वरना मां दुर्गा अप्रसन्न हो सकती हैं।
हमारे हिन्दू धर्म मे नवरात्र के नौ दिन सबसे पवित्र माने जाते है। वर्ष के शरद नवरात्र आज सोमवार से प्रारम्भ होने जा रहे है। इन नौ दिनों में माँ दुर्गा की विशेष रूप से पूजा की जाती है। नवरात्र की शुरुआत पहले दिन कलश स्थापना से की जाती है। कलश स्थापना को नवरात्रि में अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है।
कलश स्थापना शुभ मुहूर्त
इस बार 2025 की शारदीय नवरात्रि के लिए दो विशेष शुभ मुहूर्त बन रहे है। पहला मुहूर्त जो की अमृतकाल का है वो 6 बजकर 10 मिनट से 8 बजकर 6 मिन्ट तक है। तथा दूसरा शुभ मुहूर्त अभिजीत 11 बजकर 50 मिनट से 12 बजकर 39 मिनट तक रहेगा। वहीँ शास्त्रों में उल्लेख है कि कलश स्थापना करते समय ये गलतियां करने से बचना चाहिए। आइए जानते है वो कौनसी गलतियां है ?
साफ सफाई स्वच्छता का खयाल रखें
कलश स्थापना से यह सुनिश्चित कर ले कि जिस कलश में जल रखा जाएगा वह स्वच्छ है पवित्र है। शुद्व तथा पूर्णतया पवित्र स्थान पर ही कलश स्थांपना करने से लाभ की प्राप्ति होती है।
कलश खंडित ना हो
जब कभी भी किसी भी अनुष्ठान में या धार्मिक प्रयोजन में कोई कलश प्रयोग में लेते है तो यह सुनिश्चित करना चाहिये कि वह किसी भी प्रकार से खंडित ना हो। इस प्रकार के कलश का प्रयोग करना अशुभ माना जाता है। पूर्ण रूप से जांच कर सम्पूर्ण एवं अक्षत कलश का ही प्रयोग करना चाहिए।
कलश को बीच में हटाये नही
जब कलश स्थापना हो जाये तो उसको बीच मे उस स्थान से हटाए नही। हटाना एक प्रकार बसे अशुभ माना जाता है। नवरात्रि जब समाप्त हो तभी कलश का विसर्जन करे। साथ ही जब भी कलश को स्पर्श करें एक दम साफ हाथों से ही करे।
जहां कलश रखे उसे खाली ना रखे
कलश स्थापना नवरात्रि पूजा का अहम हिस्सा है। जहां भी कलश स्थापित करे उस स्थान पर नियमित रूप से दिया जलाएं तथा वहाँ पूजा अर्चना भी करे। ताकि उस स्थान की पवित्रता बनी रहे।
गृह शुद्ध करे
कलश की स्थापना करने से पूर्व पूरे घर को शुद्ध करे। किसी भी प्रकार की तामसिक वस्तु को वहां से हटाए।
नवरात्रि के दिनों में घर का वातावरण सात्त्विक और पवित्र बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
कलश स्थापना कैसे करे ?
कलश स्थापना से पूर्व पूजा घर की पूर्ण रूप से सफाई कर। उस स्थल को गंगजल से पवित्र करे। फिर मिट्टी के स्वच्छ पात्र में मिट्टी में जौ बोयें। फिर वहाँ कलश जल से भर कर रखे। जिसमें सुपारी, सिक्का, हल्दी, अक्षत और पंचरत्न डालें। तथा कलश के ऊपर नारियल को लाल वस्र में सजाकर रखे।