सीकर विवाद: कलेक्टर-मंत्री बहस पर डोटासरा का सरकार और अफसरशाही पर हमला
सीकर में कलेक्टर और मंत्री विवाद पर गोविंद सिंह डोटासरा ने सरकार पर अफसरशाही हावी होने का आरोप लगाया।
सीकर में जिला कलेक्टर मुकुल शर्मा और वन मंत्री संजय शर्मा के बीच हुई बहस का मामला अब राजनीतिक रूप लेता नजर आ रहा है। इस घटनाक्रम पर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने राज्य सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। डोटासरा ने कहा कि सीकर से सामने आई तस्वीरें पूरे राजस्थान की सच्चाई को दिखाती हैं। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश में ब्यूरोक्रेसी पूरी तरह हावी हो गई है और जनप्रतिनिधियों की सुनवाई नहीं हो रही है।
डोटासरा ने कहा कि जब एक मंत्री की स्थिति ऐसी है, तो आम जनता की हालत का अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने दावा किया कि सीकर से भी खराब हालात जयपुर में हैं, जहां सांसद मंजू शर्मा को अधिकारियों को काम करने की चेतावनी देते देखा गया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अधिकारियों को काम करने के लिए कहना पड़ रहा है, जबकि उन्हें कहीं भेजा भी नहीं जा सकता। इसी तरह उदयपुर के सांसद द्वारा लिखी गई चिट्ठी का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वहां भी अधिकारी जनप्रतिनिधियों की बात नहीं सुन रहे हैं।
उन्होंने बीकानेर का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां पुलिस अधीक्षक मंत्री का फोन तक नहीं उठाते। इसके अलावा संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम के साथ कलेक्टर और एसपी के व्यवहार को भी उन्होंने प्रशासनिक अहंकार का उदाहरण बताया।
वहीं, कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुनीता गठाला ने मंत्री और कलेक्टर के बीच विवाद को अहंकार की लड़ाई करार दिया। उन्होंने सरकार पर दिखावा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि कैंपों और कार्यक्रमों में आम लोगों के काम नहीं हो रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि नगरीय विकास मंत्री के सीकर में मौजूद होने के बावजूद नगर परिषद के अधिकारी गायब क्यों थे।
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि इस सरकार में न जनसुनवाई हो रही है और न ही जनता की समस्याओं पर ध्यान दिया जा रहा है। बेरोजगारी, महंगाई और रोजमर्रा की परेशानियों से जूझ रही जनता के बीच सरकार और प्रशासन आपसी टकराव में उलझे हुए हैं।