BJP में 'दम घुटने' की शिकायत के बाद कांग्रेस की 'घर वापसी': दिग्गज आदिवासी नेता महेंद्रजीत सिंह मालवीय की सियासी ड्रामा में नया ट्विस्ट!
राजस्थान की सियासत में बड़ा उलटफेर: दिग्गज आदिवासी नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीय ने BJP छोड़कर कांग्रेस में घर वापसी
राजस्थान की सियासत में एक बार फिर हलचल मच गई है। दिग्गज आदिवासी नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीय की कांग्रेस में 'घर वापसी' को पार्टी हाईकमान ने हरी झंडी दे दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब मालवीय हाल ही में BJP छोड़ने की खबरों के बीच इनकम टैक्स रेड का शिकार हुए थे। क्या यह सियासी बदला है या पुरानी जड़ों की ओर वापसी? आइए जानते हैं इस दिलचस्प कहानी के सभी पहलू।
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शुक्रवार रात को मालवीय की पार्टी में दोबारा शामिल होने की मंजूरी दे दी। कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इस संबंध में राजस्थान प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा को आधिकारिक पत्र भेजकर सूचित किया है। सूत्रों के मुताबिक, अब जल्द ही मालवीय औपचारिक रूप से कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण करेंगे, जो उनके सियासी करियर में एक नया अध्याय शुरू करेगा।
अनुशासन समिति की बैठक: जहां से शुरू हुई 'वापसी' की राह
इस फैसले से पहले शुक्रवार सुबह राजस्थान कांग्रेस की अनुशासन समिति की बैठक में मालवीय की घर वापसी पर गहन मंथन हुआ। समिति ने उनकी अनुशंसा रिपोर्ट तैयार कर पार्टी हाईकमान को भेजी, जिस पर तुरंत अमल किया गया। बैठक में कई अन्य नेताओं की वापसी पर भी चर्चा हुई, लेकिन फिलहाल केवल मालवीय को ही मंजूरी मिली है। यह फैसला राजस्थान कांग्रेस के लिए एक बड़ा बूस्ट माना जा रहा है, खासकर आदिवासी बहुल इलाकों में जहां मालवीय का मजबूत प्रभाव है।
हालांकि, इस 'वापसी' की राह आसान नहीं थी। मालवीय जब BJP छोड़कर कांग्रेस की ओर रुख कर रहे थे, तभी उनके व्यावसायिक ठिकानों पर इनकम टैक्स विभाग की रेड पड़ गई। बांसवाड़ा स्थित उनके पेट्रोल पंप और अन्य जगहों पर छापेमारी हुई, जिस पर मालवीय ने सवाल उठाते हुए इसे सियासी साजिश करार दिया। क्या यह संयोग था या विरोधी खेमे की चाल? यह सवाल अभी भी हवा में तैर रहा है।
11 जनवरी की वो खास घोषणा: BJP को बताया 'गलती'
मालवीय की कांग्रेस में वापसी की नींव 11 जनवरी को ही पड़ गई थी। जयपुर में एक टीवी चैनल से विशेष बातचीत में उन्होंने खुलासा किया कि वे कांग्रेस जॉइन करने जा रहे हैं। उन्होंने BJP में 'दम घुटने' की शिकायत की और इसे अपनी सबसे बड़ी गलती बताया। इससे पहले, उन्होंने दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में राजस्थान कांग्रेस प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा से मुलाकात की थी। डोटासरा ने पुष्टि की कि मालवीय ने कांग्रेस में शामिल होने के लिए प्रार्थना पत्र दिया है, जिसे अनुशासन समिति को भेजा गया। शुक्रवार की बैठक में इसी पर मुहर लगी।
नेता प्रतिपक्ष न बनने की नाराजगी: जहां से शुरू हुआ था BJP का सफर
मालवीय का सियासी ड्रामा पुराना है। 2023 विधानसभा चुनाव में वे कांग्रेस के टिकट पर बागीदौरा से जीते थे, लेकिन नेता प्रतिपक्ष न बनाए जाने से नाराज होकर उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उन्होंने BJP की सदस्यता ली और विधायक पद से भी त्यागपत्र दिया। BJP ने उन्हें डूंगरपुर-बांसवाड़ा लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया, लेकिन भारत आदिवासी पार्टी के राजकुमार रोत के हाथों हार का सामना करना पड़ा। उसके बाद से मालवीय BJP में हाशिए पर थे, जहां उनकी आवाज दबती जा रही थी। अब कांग्रेस में वापसी से क्या वे फिर से अपनी पुरानी ताकत हासिल कर पाएंगे?
कौन हैं महेंद्रजीत सिंह मालवीय? वागड़ के 'शेर' का सफर
महेंद्रजीत सिंह मालवीय वागड़ अंचल (बांसवाड़ा-डूंगरपुर इलाका) के सबसे प्रभावशाली आदिवासी नेता हैं। उनका राजनीतिक करियर चमकदार रहा है:एक बार जिला प्रमुख: स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ बनाई।
एक बार सांसद: राष्ट्रीय स्तर पर आदिवासियों की आवाज उठाई।
चार बार विधायक: बागीदौरा से लगातार जीत दर्ज की।
दो बार कैबिनेट मंत्री: गहलोत सरकार में महत्वपूर्ण विभाग संभाले।
आदिवासी समुदाय में उनका कद इतना बड़ा है कि वे 'वागड़ के शेर' कहे जाते हैं। उनकी वापसी से कांग्रेस को राजस्थान के आदिवासी इलाकों में मजबूती मिलने की उम्मीद है, खासकर आगामी चुनावों को देखते हुए।