अरावली को लेकर भ्रम पर केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव का जवाब, जानिए नई परिभाषा और माइनिंग नियम

अरावली की नई परिभाषा पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने स्पष्ट किया—बिना साइंटिफिक प्लान नहीं होगी माइनिंग

Dec 25, 2025 - 14:39
अरावली को लेकर भ्रम पर केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव  का जवाब, जानिए नई परिभाषा और माइनिंग नियम

अरावली पर्वतमाला को लेकर सुप्रीम कोर्ट की नई परिभाषा को मंजूरी मिलने के बाद देश की राजनीति और पर्यावरण जगत में बहस तेज हो गई है। नई परिभाषा के अनुसार 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाली भू-आकृतियों को ही अरावली माना जाएगा। इसे लेकर कई पर्यावरण प्रेमी और विपक्षी दल चिंता जता रहे हैं, वहीं केंद्र सरकार ने इन आशंकाओं को निराधार बताया है।

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने स्पष्ट कहा कि अरावली को लेकर कुछ लोग जानबूझकर भ्रम फैला रहे हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने परिभाषा स्वीकार करने के साथ ही यह भी साफ कर दिया है कि अरावली क्षेत्र में कोई नई माइनिंग लीज नहीं दी जाएगी। पहले जिलेवार साइंटिफिक मैनेजमेंट प्लान बनेगा, फिर उसका मूल्यांकन इंडियन काउंसिल ऑफ फॉरेस्ट रिसर्च एंड एजुकेशन (ICFRE) करेगी। इसके बाद ही किसी भी तरह की माइनिंग पर निर्णय होगा और वह भी सस्टेनेबिलिटी को ध्यान में रखकर।

मंत्री ने बताया कि अरावली का मुद्दा कांग्रेस सरकार के समय से सुप्रीम कोर्ट में लंबित था। अवैध खनन रोकने के लिए अरावली की स्पष्ट पहचान जरूरी थी, क्योंकि चार राज्यों—दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात—में फैली इस पर्वतमाला की अलग-अलग परिभाषाएं थीं। अब एक समान परिभाषा तय की गई है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रिजर्व फॉरेस्ट, वाइल्डलाइफ सेंचुरी, टाइगर रिजर्व और उनके ईको-सेंसिटिव जोन में माइनिंग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। जल स्रोतों, झीलों और रामसर साइट्स के आसपास भी खनन पर रोक होगी। लूणी, माही और बनास जैसी नदियों के उद्गम क्षेत्रों में भी माइनिंग नहीं होगी।

भूपेंद्र यादव ने कहा कि 100 मीटर की ऊंचाई को पर्वत की पूरी इकाई के रूप में देखा जाएगा, जिसमें उसके आसपास की छोटी पहाड़ियां और बीच का क्षेत्र भी शामिल होगा। इससे लगभग 90 प्रतिशत इलाका अरावली और अरावली रेंज के अंतर्गत आ जाएगा।

केंद्र सरकार का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया केवल माइनिंग के नियमन के लिए है, न कि अरावली को कमजोर करने के लिए। सरकार का मुख्य उद्देश्य अवैध खनन पर रोक लगाना और पर्यावरण संतुलन बनाए रखना है।