पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने हरमाड़ा हादसे के पीड़ितों को मुआवजा देने में देरी पर जताई चिंता

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने हरमाड़ा हादसे के पीड़ितों को राहत राशि देने में देरी पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखा।

Nov 6, 2025 - 17:54
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने हरमाड़ा हादसे के पीड़ितों को मुआवजा देने में देरी पर जताई चिंता
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (सोर्स : सोशल मीडिया द्वारा फोटो लिया गया है)

जयपुर, राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जयपुर के हरमाड़ा डंपर हादसे के पीड़ितों को मुआवजा देने में हो रही देरी पर गहरी चिंता व्यक्त की है।

उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर कहा कि जैसलमेर बस हादसे और मतोड़ा सड़क हादसे की तर्ज पर सभी पीड़ितों को तुरंत राहत राशि जारी की जाए।

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🔹 अन्य राज्यों के मृतकों को भी शामिल करने की मांग

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि मुआवजे की प्रक्रिया केवल राजस्थान के नागरिकों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि अन्य राज्यों के मृतकों को भी सहायता का लाभ मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि ऐसी संवेदनशील परिस्थितियों में प्रदेश सरकार को मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

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🔹 गहलोत बोले — “दुर्घटनाओं की श्रृंखला बेहद चिंताजनक”

अशोक गहलोत ने अपने पत्र में लिखा कि हाल के दिनों में राजस्थान में कई दर्दनाक सड़क हादसों की श्रृंखला देखने को मिली है।

उन्होंने जयपुर डंपर हादसा (13 मौत), भांकरोटा हादसा (20 मौत), मनोहरपुर-दौसा (11 मौत), मतोड़ा सड़क हादसा (15 मौत) सहित जैसलमेर बस अग्निकांड (28 मौत) और एसएमएस अस्पताल अग्निकांड (8 मौत) जैसी घटनाओं का उल्लेख किया।

गहलोत ने कहा कि यह सभी घटनाएं प्रदेश की सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।

🔹 “पीड़ित परिवारों को अब तक नहीं मिला मुआवजा”

गहलोत ने लिखा कि 5 नवंबर को एसएमएस अस्पताल में मुलाकात के दौरान पीड़ित परिवारों ने बताया कि

उन्हें अब तक किसी तरह की सरकारी सहायता नहीं मिली है।

अधिकारियों ने बताया कि उन्हें प्रधानमंत्री राहत कोष (PMNRF) और चिरंजीवी दुर्घटना बीमा योजना से मदद दी जाएगी,

लेकिन अभी तक कोई औपचारिक सहायता नहीं मिली है।

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🔹 “धरना-प्रदर्शन न होने का मतलब संवेदनहीनता नहीं होना चाहिए”

गहलोत ने पत्र में लिखा —

> “पीड़ित परिवार किसी एक समाज या समुदाय से नहीं हैं, इसलिए उनके लिए कोई धरना-प्रदर्शन नहीं हो रहा।

लेकिन इसका यह मतलब नहीं होना चाहिए कि सरकार उनकी पीड़ा को नजरअंदाज कर दे।”

उन्होंने कहा कि संवेदनशील सरकार का दायित्व है कि वह बिना किसी दबाव के स्वतः राहत राशि प्रदान करे।

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🔹 “मुआवजा में देरी संवेदनशीलता पर सवाल”

गहलोत ने कहा कि कई बार सरकारें राजनीतिक दबाव या प्रदर्शन के बाद ही मुआवजा घोषित करती हैं,

जो राज्य की संवेदनशीलता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।

उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से आग्रह किया कि सभी मृतकों और घायलों के परिवारों को अविलंब राहत राशि जारी की जाए।

Mahaveer Sankhlecha I am a reporter dedicated to delivering accurate news and meaningful stories to the public.