दिग्विजय सिंह के पोस्ट से कांग्रेस में घमासान, हरीश चौधरी ने जताई सख्त आपत्ति

दिग्विजय सिंह के RSS संदर्भित पोस्ट पर कांग्रेस में मतभेद, हरीश चौधरी के जवाब से सियासत गरमाई

Dec 29, 2025 - 09:43
दिग्विजय सिंह के पोस्ट से कांग्रेस में घमासान, हरीश चौधरी ने जताई सख्त आपत्ति

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने सियासी हलकों में नई बहस छेड़ दी है। यह पोस्ट भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े संदर्भों को लेकर था, जिसे कांग्रेस के भीतर ही कुछ नेताओं ने पसंद नहीं किया। खासतौर पर मध्यप्रदेश कांग्रेस के प्रभारी और राजस्थान के बायतू विधायक हरीश चौधरी ने इस पोस्ट पर खुलकर आपत्ति जताई है। उनके बयान के बाद कांग्रेस के अंदर चल रही वैचारिक असहमति एक बार फिर सामने आ गई है।

क्या है पूरा मामला

दरअसल, दिग्विजय सिंह ने शनिवार को अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर एक पुरानी तस्वीर साझा की। इस तस्वीर में भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी कुर्सी पर बैठे नजर आ रहे हैं, जबकि उनके ठीक सामने की पंक्ति में नीचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बैठे दिखाई देते हैं। जानकारी के अनुसार यह फोटो वर्ष 1995 का बताया जा रहा है, जब गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल का शपथ ग्रहण समारोह हुआ था।

इस फोटो के साथ दिग्विजय सिंह ने एक टिप्पणी लिखी, जिसमें संगठन और संगठन शक्ति से जुड़े संदर्भों का जिक्र किया गया। उन्होंने इस पोस्ट में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, जयराम रमेश के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी टैग किया। पोस्ट सामने आते ही सोशल मीडिया पर इस पर प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया।

पोस्ट को लेकर क्यों बढ़ा विवाद

दिग्विजय सिंह की पोस्ट को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा RSS के संदर्भ में की गई टिप्पणी को लेकर हुई। कांग्रेस के कई समर्थकों और नेताओं को यह अंदाज पसंद नहीं आया। उनका मानना है कि भाजपा और RSS के संदर्भ में कांग्रेस को स्पष्ट और सख्त रुख अपनाना चाहिए। इसी पृष्ठभूमि में हरीश चौधरी का बयान सामने आया, जिसने विवाद को और हवा दे दी।

हरीश चौधरी का तीखा जवाब

मध्यप्रदेश कांग्रेस के प्रभारी हरीश चौधरी ने भी सोशल मीडिया के जरिए ही दिग्विजय सिंह को जवाब दिया। उन्होंने एक्स पर लिखा कि जिन व्यक्तियों के संदर्भ में “संगठन शक्ति” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है, वे संगठन शक्ति के दम पर नहीं, बल्कि षड्यंत्र, साजिश, घृणा, वोट चोरी और उद्योगपतियों के धनबल के सहारे सत्ता तक पहुंचे हैं।

हरीश चौधरी के इस बयान को दिग्विजय सिंह की पोस्ट पर सीधी असहमति के तौर पर देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह सिर्फ एक पोस्ट पर प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि कांग्रेस के भीतर चल रही वैचारिक बहस का हिस्सा भी है।

कांग्रेस के भीतर अलग-अलग सुर

इस पूरे घटनाक्रम के बाद कांग्रेस के अंदर अलग-अलग राय सामने आ रही है। कुछ नेता दिग्विजय सिंह के पोस्ट को ऐतिहासिक संदर्भ में देखने की बात कर रहे हैं, जबकि कुछ नेताओं का मानना है कि इस तरह की पोस्ट पार्टी की आधिकारिक लाइन से भ्रम पैदा कर सकती हैं। हालांकि अब तक पार्टी की ओर से इस मुद्दे पर कोई औपचारिक बयान नहीं आया है।

फिलहाल शांत हैं दोनों नेता

दिलचस्प बात यह है कि हरीश चौधरी के बयान के बाद भी दिग्विजय सिंह की ओर से कोई नई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं हरीश चौधरी ने भी आगे कोई अतिरिक्त टिप्पणी नहीं की है। ऐसे में फिलहाल यह विवाद सोशल मीडिया तक ही सीमित नजर आ रहा है।

सियासी संदेश और आगे की तस्वीर

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला आने वाले समय में कांग्रेस की आंतरिक रणनीति और बयानबाजी को लेकर चर्चा का विषय बना रह सकता है। सोशल मीडिया के दौर में नेताओं की हर पोस्ट राजनीतिक संदेश बन जाती है, और इसी वजह से ऐसे विवाद जल्दी तूल पकड़ लेते हैं। फिलहाल सभी की नजर इस पर है कि पार्टी नेतृत्व इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है और क्या इस पर कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं या नहीं।