जिला परिवर्तन पर केके विश्नोई का शक्ति प्रदर्शन, भीड़ ने बदला सियासी माहौल

धोरीमन्ना में केके विश्नोई के शक्ति प्रदर्शन से जिला परिवर्तन विरोध की राजनीति को लगा बड़ा झटका

Jan 26, 2026 - 13:49
जिला परिवर्तन पर केके विश्नोई का शक्ति प्रदर्शन, भीड़ ने बदला सियासी माहौल

जिला पुनर्गठन और जिला मुख्यालय परिवर्तन के बाद पहली बार राजस्थान सरकार के राज्यमंत्री केके विश्नोई की ओर से धोरीमन्ना में शक्ति प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया। आलमजी मेला मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। मंच से लेकर मैदान तक लोगों की मौजूदगी ने इसे एक राजनीतिक कार्यक्रम से आगे बढ़कर जन-उत्सव का रूप दे दिया। कार्यक्रम का उद्देश्य साफ था—यह दिखाना कि धोरीमन्ना और गुड़ामालानी तहसील को बालोतरा जिले में शामिल करने का फैसला जनता की भावना के अनुरूप है।

स्वरूप सिंह खारा का विपक्ष पर हमला

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिव विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी स्वरूप सिंह खारा ने कांग्रेस और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) पर निशाना साधा। उन्होंने स्थानीय बोली में कहा- 

“कांग्रेस और RLP ने कहणों चाहूं कि ए कि जनता है का कांई है… हब्बीड़ बोला दियो हे के के साहब।”

उनके इस बयान को विपक्ष के विरोध के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। खारा ने मंच से यह संदेश देने की कोशिश की कि जनता का समर्थन भाजपा और केके विश्नोई के साथ है।

केके विश्नोई ने सोशल मीडिया पर साझा की तस्वीरें

कार्यक्रम के बाद केके विश्नोई ने शक्ति प्रदर्शन की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं। उन्होंने लिखा कि जब जनता का साथ मिलता है, तब बड़े से बड़े फैसले भी सही साबित होते हैं। उन्होंने धोरीमन्ना और गुड़ामालानी को बालोतरा जिले में शामिल किए जाने को ऐतिहासिक निर्णय बताया।विश्नोई ने कहा कि स्वागत और अभिनंदन समारोह जनता के उत्साह के कारण एक जन-उत्सव में बदल गया, जो इस फैसले के प्रति लोगों की स्वीकृति को दर्शाता है।

विपक्ष के विरोध के बीच शक्ति प्रदर्शन का संदेश

पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस और आरएलपी जिला मुख्यालय परिवर्तन और जिले के पुनर्गठन के फैसले का विरोध कर रही थीं। विरोध प्रदर्शन, बयानबाजी और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा था।ऐसे माहौल में केके विश्नोई का यह शक्ति प्रदर्शन एक राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। बड़ी संख्या में लोगों को एकत्र कर यह दिखाने की कोशिश की गई कि जिला परिवर्तन का फैसला जनहित में है और इसे जनता का समर्थन प्राप्त है।

भीड़ ने बदला सियासी माहौल

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस कार्यक्रम में उमड़ी भीड़ ने बीते दिनों गरमाए माहौल को काफी हद तक ठंडा किया है। लोकतंत्र में संख्या का महत्व होता है और इस शक्ति प्रदर्शन ने यह संकेत दिया कि जमीन पर स्थिति उतनी विरोधात्मक नहीं है, जितनी दिखाई जा रही थी। कार्यक्रम के जरिए यह संदेश भी गया कि जिला पुनर्गठन को लेकर अंतिम और निर्णायक बातचीत फिलहाल केके विश्नोई के इर्द-गिर्द ही केंद्रित रहेगी।

2027 तक थमेगा विवाद, फिर होगी सियासी गर्मी

गौरतलब है कि प्रशासनिक सीमाओं के फेरबदल पर मई 2027 तक रोक लगी हुई है। ऐसे में तब तक इस मुद्दे पर कोई बड़ा सरकारी बदलाव संभव नहीं है। हालांकि राजनीतिक चर्चाएं और बयानबाजी चलती रहेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव नजदीक आते ही यह मुद्दा फिर से गरमा सकता है। कुछ दल इसे गलत फैसला बताने की कोशिश करेंगे, जबकि कुछ इसे जनहित में लिया गया सही निर्णय साबित करने में जुटेंगे।

आगे की राजनीति पर टिकी नजर

फिलहाल केके विश्नोई के शक्ति प्रदर्शन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जिला परिवर्तन का मुद्दा अभी खत्म नहीं हुआ है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन इस विषय को जनता के बीच कितनी मजबूती से रख पाता है और इसका राजनीतिक लाभ किसे मिलता है।