दो सगी बहनों से दुष्कर्म के आरोपियों को उम्रकैद तक जेल, पीड़िताओं को 10 लाख मुआवजा

राजस्थान के बाड़मेर जिले में पॉक्सो कोर्ट बालोतरा ने दो नाबालिग सगी बहनों के साथ दुष्कर्म के मामले में दोनों आरोपियों को आजीवन कारावास (मरने तक जेल) की सजा सुनाई है।

Dec 18, 2025 - 14:54
दो सगी बहनों से दुष्कर्म के आरोपियों को उम्रकैद तक जेल, पीड़िताओं को 10 लाख मुआवजा

बालोतरा/बाड़मेर। राजस्थान के बाड़मेर जिले में बच्चों के यौन शोषण के एक सनसनीखेज मामले में पॉक्सो कोर्ट बालोतरा ने बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है। अदालत ने दो आरोपियों को जिंदगी भर जेल में रखने की सजा सुनाई है, साथ ही आर्थिक दंड और पीड़िताओं को मुआवजे का आदेश दिया है। यह बाड़मेर जिले का पहला ऐसा मामला है, जहां पॉक्सो एक्ट 2012 के तहत आरोपियों को 'मरने तक जेल' की सजा दी गई है।

साढ़े पांच साल बाद मिला न्याय

यह मामला जून 2020 का है, जिस पर फैसला साढ़े पांच साल बाद आया। विशिष्ट न्यायाधीश (पॉक्सो) राजेंद्र बंशीवाल की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद दोनों आरोपियों को आजीवन कारावास (जिंदगी भर जेल) की सजा सुनाई। साथ ही प्रत्येक आरोपी पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। जुर्माना नहीं भरने पर अतिरिक्त छह महीने की सजा भुगतनी होगी। 

दो नाबालिग सगी बहनों का शोषण

मामला 2 जून 2020 को तब सामने आया जब एक पिता अपनी दो नाबालिग बेटियों के साथ महिला थाने पहुंचा। रिपोर्ट में बताया गया कि उसकी तीन बेटियां हैं, जिनमें से दो को दो युवक लगातार पीछा करके अश्लील टिप्पणियां और इशारे करते थे। उस समय दोनों पीड़िता बहनें सातवीं कक्षा में पढ़ती थीं। सुरक्षा की चिंता में परिजनों ने उन्हें स्कूल भेजना बंद कर दिया, लेकिन आरोपी पीछा करना नहीं छोड़ रहे थे।1 जून 2020 को एक पीड़िता ने अपनी मां को बताया कि एक आरोपी ने शादी का झांसा देकर करीब एक साल तक उसके साथ बार-बार दुष्कर्म किया। आरोपी उसे घर ले जाकर शोषण करता था और एक मोबाइल फोन भी दिया था, जिसे पुलिस ने बाद में बरामद कर लिया। 

मजबूत जांच और पैरवी से मिला न्याय

पुलिस ने मामला दर्ज करने के बाद दोनों पीड़िताओं का मेडिकल परीक्षण करवाया और फॉरेंसिक सैंपल एफएसएल भेजे। आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पीड़ित पक्ष की ओर से विशिष्ट लोक अभियोजक रमेश कच्छवाहा और वरिष्ठ अधिवक्ता करनाराम चौधरी ने प्रभावी पैरवी की, जिससे मामले में मजबूत सबूत पेश हो सके। 

पीड़िताओं को 5-5 लाख रुपये क्षतिपूर्ति

अदालत ने सजा के साथ-साथ न्याय की मिसाल कायम करते हुए दोनों पीड़िताओं को 5-5 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया। इसमें से 2 लाख रुपये दो साल के लिए राष्ट्रीयकृत बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में रखे जाएंगे, जबकि बाकी 3 लाख रुपये प्रत्येक पीड़िता के बचत खाते में जमा होंगे।