बाड़मेर-जैसलमेर के साथ धोखा है यह बजट: सांसद बेनीवाल बोले- 'ये हकीकत नहीं, आंकड़ों की बाजीगरी है
सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने केंद्रीय बजट 2026-27 को किसानों और युवाओं के लिए निराशाजनक बताया है। जानिए कैसे इनकम टैक्स, कर्ज और स्थानीय मुद्दों पर उन्होंने सरकार को घेरा। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
केंद्रीय बजट 2026-27 आने के बाद बाड़मेर-जैसलमेर के सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया में साफ कहा कि यह बजट 'Ground Reality' (जमीनी हकीकत) से कोसों दूर है। बेनीवाल के मुताबिक, दिल्ली में बैठकर बनाया गया यह बजट न तो थार के रेगिस्तान में पसीना बहाने वाले किसान का दर्द समझता है और न ही नौकरी के लिए भटक रहे युवाओं की चिंता करता है। इसे सीधे शब्दों में कहें तो यह सिर्फ 'आंकड़ों का मायाजाल' है, जिसमें आम आदमी के लिए संवेदनाएं जीरो हैं।
मिडिल क्लास और नौकरीपेशा की जेब पर सीधा वार
सरकार भले ही 'विकाित भारत' और तेज ग्रोथ का ढिंढोरा पीट रही हो, लेकिन बजट के आंकड़े कुछ और ही 'स्टोरी' बता रहे हैं। सांसद बेनीवाल ने बताया कि इस साल सरकार ने कुल ₹28.67 लाख करोड़ टैक्स वसूलने का प्लान बनाया है। इसमें सबसे ज्यादा मार आम आदमी पर पड़ने वाली है।
Income Tax: सरकार नौकरीपेशा लोगों से ₹14.66 लाख करोड़ वसूलेगी।
GST: आम उपभोक्ताओं से ₹10.19 लाख करोड़ इकट्ठा किए जाएंगे।
सांसद का कहना है कि इसका सीधा मतलब है कि सरकार का पूरा फोकस मिडिल क्लास और सैलरीड क्लास (Salaried Class) का खून चूसने पर है, जबकि टैक्स स्लैब में कोई ठोस राहत (Relief) नहीं दी गई है। वहीं, कॉरपोरेट टैक्स से ₹12.31 लाख करोड़ आने की उम्मीद है, मतलब बड़े उद्योगपतियों को तो रियायतें मिल रही हैं, लेकिन आम जनता पर बोझ बढ़ाया जा रहा है।
रेगिस्तान की प्यास और स्थानीय मुद्दों की अनदेखी
पश्चिमी राजस्थान की नब्ज पकड़ते हुए बेनीवाल ने कहा कि बाड़मेर और जैसलमेर जैसे सरहदी इलाकों को इस बजट से 'ठेंगा' मिला है। हमारा इलाका भीषण गर्मी, सूखे और पानी की किल्लत (Water Scarcity) के लिए जाना जाता है। उम्मीद थी कि सरकार यहाँ के किसानों और पशुपालकों के लिए कोई 'स्पेशल पैकेज' लाएगी, लेकिन बजट में न तो सिंचाई (Irrigation) के लिए कोई बड़ा प्रोजेक्ट है और न ही यहाँ के प्रसिद्ध ऊन उद्योग (Wool Industry) के लिए कोई प्रोविजन। यहाँ के लोग रोजगार के लिए तरस रहे हैं, लेकिन सरकार खामोश है।
उधारी की जिंदगी: कर्ज के बोझ तले दबता भविष्य
बजट का पोस्टमार्टम करते हुए सांसद ने इसे 'कर्ज वाला बजट' करार दिया। उन्होंने कहा कि सरकार का पूरा सिस्टम उधारी पर चल रहा है।
Total Borrowing: इस बार कुल उधारी ₹16.63 लाख करोड़ रखी गई है।
Market Loan: इसमें से बाजार से ₹11.73 लाख करोड़ का कर्ज उठाया जाएगा।
बेनीवाल ने चेताया कि यह 'कड़वी सच्चाई' है कि सरकार अपनी वाहवाही के चक्कर में आने वाली पीढ़ियों को कर्ज के दलदल में धकेल रही है। रोजगार पैदा करने (Job Creation) और इनकम बढ़ाने का कोई रोडमैप नहीं है, बस कर्ज लो और काम चलाओ।
राज्यों के साथ नाइंसाफी
राज्यों को टैक्स का जो हिस्सा (₹15.26 लाख करोड़) दिया जाएगा, वह बढ़ती महंगाई और जिम्मेदारियों के हिसाब से 'ऊंट के मुंह में जीरा' है। राजस्थान जैसे राज्य, जो बॉर्डर सिक्योरिटी और पानी के संकट से जूझ रहे हैं, उनके लिए एक्स्ट्रा मदद का कोई जिक्र तक नहीं है। वहीं, सरकार अपनी कमाई (Non-Tax Revenue) के लिए ₹6.66 लाख करोड़ का टारगेट रख रही है, जो पूरी तरह RBI और सरकारी कंपनियों (PSUs) के मुनाफे पर टिका है।
निष्कर्ष: आंकड़ों से नहीं, लोगों से चलता है देश
अंत में कांग्रेस सांसद ने दो टूक कहा कि बाड़मेर-जैसलमेर की जनता को इस बजट से घोर निराशा हाथ लगी है। यह बजट किसान विरोधी, युवा विरोधी और गरीब विरोधी है। हम मांग करते हैं कि सरकार इन हवाहवाई आंकड़ों से बाहर निकले और ग्रामीण भारत (Rural India) के लिए कोई 'रियल बजट' लेकर आए। देश एक्सेल शीट (Excel Sheet) के आंकड़ों से नहीं, लोगों की खुशहाली से चलता है।