नाबार्ड की सख्ती से 5 जिला सहकारी बैंक फंड से बाहर, किसानों को लोन और ब्याज छूट पर संकट

नाबार्ड की फंडिंग रुकी तो राजस्थान के 5 जिला सहकारी बैंकों से किसानों को लोन और 9% ब्याज राहत नहीं मिल रही

Dec 28, 2025 - 09:41
नाबार्ड की सख्ती से 5 जिला सहकारी बैंक फंड से बाहर, किसानों को लोन और ब्याज छूट पर संकट

राजस्थान में जिला सहकारी बैंकों की कमजोर आर्थिक स्थिति का सीधा असर अब किसानों और ग्रामीण मजदूरों पर दिखाई देने लगा है। नाबार्ड के सख्त मापदंडों के चलते राज्य के पांच जिला सहकारी बैंकों को नई फंडिंग नहीं मिल रही है। इससे किसानों को न तो समय पर कृषि ऋण मिल पा रहा है और न ही 9 प्रतिशत ब्याज अनुदान का लाभ मिल रहा है।

सहकारिता विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार बाड़मेर, नागौर, पाली, जैसलमेर और भरतपुर जिला सहकारी बैंक नाबार्ड की धारा-11 के तहत तय मानकों पर खरे नहीं उतर पाए हैं। इन मानकों में न्यूनतम पूंजी, वित्तीय स्थिरता और ऋण वसूली की स्थिति शामिल है। कई बैंकों में बढ़ते एनपीए और कमजोर बैलेंस शीट के कारण नाबार्ड ने नई राशि जारी करने से इनकार कर दिया है। जैसलमेर और पाली बैंक में देनदारियों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि भरतपुर बैंक का एनपीए लगभग 8 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

इस स्थिति का असर आम लोगों पर भी पड़ा है। सरकार द्वारा किसान सम्मान निधि और मजदूरी की राशि खातों में डालने के बावजूद कई इलाकों में लोगों को बैंक से पैसा नहीं मिल पा रहा है। पूर्व सैनिक ताराचंद ने बताया कि उनके खाते में मजदूरी के 14 हजार रुपये आए, लेकिन बैंक में नकदी नहीं होने के कारण भुगतान नहीं हो सका। कई किसानों और मजदूरों को बार-बार बैंक के चक्कर काटने पड़े।

सहकारिता विभाग के आंकड़ों के अनुसार बाड़मेर बैंक में 9,544 करोड़ रुपये की जमा के मुकाबले 3,117 करोड़ का ऋण है, जबकि भरतपुर बैंक में 7,985 करोड़ की जमा के सामने केवल 1,373 करोड़ का ऋण वितरित हुआ है। राज्य सरकार ने बैंकों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए प्रस्ताव तैयार करने की बात कही है और नाबार्ड से बातचीत का भरोसा दिया है।

यदि समय रहते समाधान नहीं निकला, तो आने वाले रबी सीजन में किसानों को ऋण संकट का सामना करना पड़ सकता है, जिससे खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ने की आशंका है।