राजस्थान में वन स्टेट वन इलेक्शन की तैयारी तेज, 12 जिलों के पंचायत बोर्ड हो सकते हैं भंग
राजस्थान में वन स्टेट वन इलेक्शन को लेकर सरकार सक्रिय, पंचायत बोर्ड भंग कर एक साथ चुनाव की तैयारी तेज
राजस्थान सरकार प्रदेश में ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। इसके तहत सरकार एक साथ ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद के चुनाव कराने की तैयारी में है। इस योजना को लागू करने के लिए जयपुर, जोधपुर सहित प्रदेश के 12 जिलों में जिला परिषद और पंचायत समितियों के बोर्ड समय से पहले भंग किए जा सकते हैं। हाल ही में राज्य चुनाव आयोग ने सरकार को पत्र लिखकर इस विषय पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा था, जिसके बाद प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है।
सरपंचों से चर्चा, मुख्यमंत्री स्तर पर मंथन संभव
चुनाव आयोग की चिट्ठी के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में पंचायती राज से जुड़े अधिकारियों ने प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से सरपंच प्रतिनिधियों को बुलाकर चर्चा की। इस दौरान ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ को लेकर उनकी राय ली गई और संकेत दिए गए कि बोर्ड भंग किए जा सकते हैं। अब 17 जनवरी को बजट पूर्व संवाद के दौरान मुख्यमंत्री स्वयं सरपंच प्रतिनिधियों से इस मुद्दे पर अंतिम चर्चा कर सकते हैं।राजस्थान सरपंच संघ के प्रवक्ता रफीक पठान का कहना है कि सरकार ने उनसे एक साथ चुनाव कराने को लेकर राय मांगी थी। उन्होंने सरकार के फैसले के साथ रहने की बात कही है।
एक साथ चुनाव क्यों नहीं हो पाए?
आमतौर पर राजस्थान में पंचायत चुनाव एक साथ होते रहे हैं, लेकिन कोरोना काल (2020 से 2022) के दौरान कई पंचायतों का कार्यकाल पूरा होने के बावजूद चुनाव नहीं हो सके। उस समय सरकार ने सरपंचों को ही प्रशासक बनाकर उनका कार्यकाल बढ़ा दिया था। इसी कारण प्रदेश में अलग-अलग जिलों में पंचायत समितियों और जिला परिषदों का कार्यकाल अलग-अलग समय पर समाप्त हुआ।
कार्यकाल और कानूनी स्थिति
पुराने जिलों के हिसाब से 21 और नए के अनुसार 25 जिलों में पंचायत समितियों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। वहीं पुराने 12 जिलों (नए जिलों को मिलाकर 16) में कई पंचायत समितियों और जिला परिषदों का कार्यकाल अभी बाकी है। सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के उस आदेश पर मुहर लगा दी है, जिसमें 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत चुनाव कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद राज्य चुनाव आयोग ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं।
सरकार को क्या करना होगा?
यदि सरकार ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ लागू करना चाहती है तो उसे दो अहम फैसले लेने होंगे।पहला, जिन 12 जिलों में पंचायत समितियों और जिला परिषदों का कार्यकाल बाकी है, वहां समय से पहले बोर्ड भंग करने होंगे। दूसरा, नगरीय निकाय और पंचायतीराज संस्थाओं के चुने हुए बोर्ड को करीब 6 महीने पहले भंग करने का निर्णय लेना होगा, ताकि पूरे प्रदेश में एक साथ चुनाव कराए जा सकें।
सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
जानकारों के अनुसार सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती कानूनी है। कुछ जिलों में जिला परिषद और पंचायत समितियों का कार्यकाल पूरा होने में अभी 8 महीने का समय बचा है। यदि सरकार समय से पहले बोर्ड भंग करती है तो वहां के जनप्रतिनिधि कोर्ट का रुख कर सकते हैं। फिलहाल 12 जिलों की 12 जिला परिषद और करीब 135 पंचायत समितियां इस योजना में सबसे बड़ी अड़चन मानी जा रही हैं।
चुनावी तैयारियां: ईवीएम और बैलेट बॉक्स
राज्य चुनाव आयोग ने संभावित एक साथ चुनाव के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। आयोग को हरियाणा से 40 हजार और मध्य प्रदेश से 10 हजार ईवीएम मिल चुकी हैं, जबकि 10 हजार ईवीएम पहले से मौजूद हैं। कुल मिलाकर 60 हजार ईवीएम की व्यवस्था की गई है।वहीं वार्ड पंच और सरपंच के चुनाव बैलेट बॉक्स से कराने की योजना है। इसके लिए गुजरात से एक लाख बैलेट बॉक्स मंगाए जा रहे हैं।
अंतिम फैसला सरकार के हाथ
राजस्थान सरपंच संघ के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर गढ़वाल का कहना है कि एक साथ चुनाव कराना पूरी तरह सरकार का निर्णय है। सरपंच संगठन चुनाव का स्वागत करता है और सरकार जो भी फैसला लेगी, उसके साथ रहेगा।कुल मिलाकर, राजस्थान में ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ की राह आसान नहीं है, लेकिन सरकार और चुनाव आयोग की तैयारियों से साफ है कि आने वाले महीनों में इस पर बड़ा फैसला लिया जा सकता है।