RPSC सदस्य संगीता आर्य का इस्तीफा मंजूर, कार्यकाल से पहले छोड़ा पद

RPSC सदस्य संगीता आर्य का इस्तीफा राज्यपाल ने किया मंजूर, आयोग में अब कोई महिला सदस्य नहीं

Jan 7, 2026 - 12:33
RPSC सदस्य संगीता आर्य का इस्तीफा मंजूर, कार्यकाल से पहले छोड़ा पद

राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की सदस्य डॉ. संगीता आर्य का इस्तीफा औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया गया है। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने उनके इस्तीफे को मंजूरी दी, जिसके बाद राज्य के कार्मिक विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी किया। मंजूरी मिलते ही आरपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट से डॉ. संगीता आर्य का नाम, फोटो और विवरण हटा दिया गया। अब आयोग की वेबसाइट पर कुल सात सदस्यों के नाम दर्ज हैं, जिनमें एक सदस्य बाबूलाल कटारा के नाम के आगे ‘निलंबित’ लिखा हुआ है।

नवंबर 2025 में दिया था इस्तीफा

डॉ. संगीता आर्य ने अपना इस्तीफा पिछले साल नवंबर 2025 में राज्यपाल को भेजा था। हालांकि उस समय इस्तीफे पर तत्काल कोई निर्णय नहीं हुआ, लेकिन अब राज्यपाल की स्वीकृति के साथ यह प्रक्रिया पूरी हो गई है। इस्तीफा स्वीकार होने के बाद प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक औपचारिकताएं भी पूरी कर ली गई हैं।

2020 में हुई थी नियुक्ति, 2026 तक था कार्यकाल

डॉ. संगीता आर्य को अक्टूबर 2020 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान राजस्थान लोक सेवा आयोग का सदस्य नियुक्त किया गया था। नियमानुसार उनका कार्यकाल अक्टूबर 2026 तक का था, लेकिन तय अवधि से लगभग एक साल पहले ही उन्होंने पद छोड़ दिया। डॉ. संगीता आर्य राज्य के पूर्व मुख्य सचिव निरंजन आर्य की पत्नी हैं और प्रशासनिक पृष्ठभूमि से जुड़ा उनका नाम लंबे समय से चर्चा में रहा है।

महिला सदस्य का पद खाली, आयोग में कोई महिला नहीं

डॉ. संगीता आर्य के इस्तीफे के बाद राजस्थान लोक सेवा आयोग में अब कोई भी महिला सदस्य नहीं बची है। इससे पहले आयोग की एक अन्य महिला सदस्य डॉ. मंजू शर्मा भी इस्तीफा दे चुकी हैं। इस स्थिति को लेकर प्रशासनिक और सामाजिक हलकों में चर्चा है कि राज्य की सबसे महत्वपूर्ण भर्ती संस्था में महिला प्रतिनिधित्व पूरी तरह समाप्त हो गया है।

एसआई भर्ती परीक्षा 2021 और हाईकोर्ट की टिप्पणी

आरपीएससी से जुड़े विवादों की पृष्ठभूमि में एसआई भर्ती परीक्षा 2021 का मामला अहम माना जा रहा है। इस भर्ती परीक्षा को रद्द करने के आदेश के साथ राजस्थान हाईकोर्ट ने आयोग की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की थी। अदालत ने अपने आदेश में आरपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष और सदस्यों पर तल्ख शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा था कि आयोग के भीतर प्रणालीगत भ्रष्टाचार के संकेत मिले हैं। कोर्ट के अनुसार, लिखित परीक्षा और साक्षात्कार, दोनों चरणों में भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित हुई है।

डॉ. मंजू शर्मा ने नैतिक आधार पर छोड़ा पद

हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद आरपीएससी की सदस्य डॉ. मंजू शर्मा ने सितंबर में इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने राज्यपाल को भेजे अपने पत्र में स्पष्ट किया था कि उनके खिलाफ कोई जांच या आरोप लंबित नहीं है, लेकिन आयोग की गरिमा और पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए वे नैतिक आधार पर पद छोड़ रही हैं। इसके कुछ समय बाद नवंबर में डॉ. संगीता आर्य ने भी इस्तीफा दे दिया था।

आरपीएससी की साख पर उठे सवाल

लगातार इस्तीफों, निलंबन और अदालती टिप्पणियों के चलते राजस्थान लोक सेवा आयोग की साख पर सवाल खड़े हुए हैं। आयोग राज्य की सबसे बड़ी भर्ती संस्था है, जिसके माध्यम से हजारों युवाओं का भविष्य तय होता है। ऐसे में सदस्यों के इस्तीफे और विवादों ने भर्ती प्रक्रियाओं की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

आगे की राह पर नजर

डॉ. संगीता आर्य का इस्तीफा स्वीकार होने के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार आयोग में खाली पदों को कैसे और कब भरती है। साथ ही, भविष्य में भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर भी सभी की नजरें टिकी रहेंगी।