भैंस बेचकर खेती शुरू करने वाली सीकर की संतोष देवी, राष्ट्रपति भवन की खास मेहमान बनीं

सीकर की संतोष देवी खेदड़ ने भैंस बेचकर खेती शुरू की और गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति भवन पहुंचीं

Jan 27, 2026 - 14:12
भैंस बेचकर खेती शुरू करने वाली सीकर की संतोष देवी, राष्ट्रपति भवन की खास मेहमान बनीं

राजस्थान के सीकर जिले के बेरी गांव की रहने वाली संतोष देवी खेदड़ आज देशभर के किसानों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। भैंस बेचकर खेती की शुरुआत करने वाली यह महिला किसान देश के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित प्रतिष्ठित ‘एट होम’ कार्यक्रम की खास मेहमान रहीं। यह सम्मान न सिर्फ उनके लिए, बल्कि पूरे जिले और राज्य के लिए गर्व की बात है।

राष्ट्रपति भवन से मिला खास निमंत्रण

गणतंत्र दिवस के मौके पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित ‘एट होम’ कार्यक्रम में देशभर से चुनिंदा लोगों को आमंत्रित किया गया था। इस सूची में विभिन्न राज्यों के प्रगतिशील किसान भी शामिल थे। राजस्थान से सीकर जिले की संतोष देवी खेदड़ को उनकी कृषि में की गई नई रिसर्च और नवाचारों के लिए इस समारोह में शामिल होने का विशेष निमंत्रण मिला। उनकी मौजूदगी ने यह साबित कर दिया कि मेहनत और लगन से गांव की महिलाएं भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना सकती हैं।

भैंस बेचकर की खेती की शुरुआत

संतोष देवी खेदड़ की कहानी संघर्ष और साहस से भरी हुई है। साल 2008 में उन्होंने मात्र 5 बीघा जमीन पर बागवानी खेती शुरू की। अनार की खेती के लिए संसाधनों की कमी थी, ऐसे में उन्होंने अपनी एकमात्र भैंस तक बेच दी। इसके साथ ही उधार लेकर ड्रिप सिंचाई व्यवस्था स्थापित की। सीमित साधनों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और नई तकनीकों को अपनाते हुए खेती को आगे बढ़ाया।

रेतीले इलाकों में सेब-अनार की सफल खेती

संतोष देवी की रिसर्च खास तौर पर राजस्थान जैसे रेतीले और कठिन इलाकों में सेब और अनार की एडवांस्ड बागवानी पर केंद्रित रही है। आमतौर पर इन क्षेत्रों में ऐसी फसलों की खेती को मुश्किल माना जाता है, लेकिन उन्होंने वैज्ञानिक तरीकों और आधुनिक तकनीक के जरिए यह साबित कर दिखाया कि सही योजना और मेहनत से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। उनकी रिसर्च यह संदेश देती है कि सीमित संसाधनों में भी खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है।

सीमित साधनों में बड़ी सफलता

अपनी रिसर्च के आधार पर संतोष देवी आज फलों के पौधों की नर्सरी चला रही हैं। आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पद्धतियों से खेती कर वह लगभग 40 लाख रुपये सालाना की आय अर्जित कर रही हैं। उनकी सफलता से आसपास के किसानों को भी प्रेरणा मिली है। कई किसान अब वैज्ञानिक बागवानी अपनाकर अपनी आय बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।

संस्थानों का रहा अहम योगदान

संतोष देवी की इस उपलब्धि में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), अटारी (ATARI) और कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) फतेहपुर की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। इन संस्थानों ने उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों से परिचित कराया और नए प्रयोगों में सहयोग दिया। चयन प्रक्रिया के दौरान भी इन संस्थाओं ने उनके नवाचारों को पहचान दिलाने में मदद की।

कम पढ़ाई, बड़ा हौसला

पांचवीं कक्षा तक पढ़ी-लिखी संतोष खेदड़ ने यह साबित कर दिया कि शिक्षा की कमी कभी भी आत्मविश्वास और मेहनत के रास्ते में बाधा नहीं बन सकती। उन्होंने अपने अनुभव और सीखने की इच्छा से खेती में नए प्रयोग किए और सफलता हासिल की।

सम्मान को बताया किसानों की जीत

राष्ट्रपति भवन में मिले सम्मान पर संतोष देवी खेदड़ ने राष्ट्रपति के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि सिर्फ उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि देश के प्रगतिशील किसानों और कृषि नवाचारों की सामूहिक पहचान है। उनकी कहानी आज हर उस किसान के लिए उम्मीद की किरण है, जो सीमित संसाधनों में भी कुछ बड़ा करने का सपना देखता है।