SIR पर सियासी घमासान: कांग्रेस का आरोप, हर विधानसभा में कटे हजारों वोट

राजस्थान में SIR को लेकर राजनीति गरमाई, कांग्रेस ने भाजपा पर लगाए वोट कटवाने के गंभीर आरोप

Jan 15, 2026 - 13:37
SIR पर सियासी घमासान: कांग्रेस का आरोप, हर विधानसभा में कटे हजारों वोट

राजस्थान में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस ने इस प्रक्रिया का विरोध करते हुए आरोप लगाया है कि मतदाता सूची से चुनिंदा वर्गों के नाम हटाए जा रहे हैं। पार्टी का दावा है कि हर विधानसभा क्षेत्र में 5 से 6 हजार तक कांग्रेस समर्थित वोट कटवाए गए हैं। वहीं, भाजपा और चुनाव आयोग इन आरोपों को बेबुनियाद बता रहे हैं।


कांग्रेस का आरोप: लोकतंत्र पर सीधा हमला

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि SIR की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी एक समुदाय विशेष के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। आरोप है कि यह सब सुनियोजित तरीके से किया गया ताकि विपक्ष के वोट कमजोर किए जा सकें। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि यह कोई सामान्य प्रशासनिक मामला नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा हमला है। डोटासरा ने दावा किया कि राजस्थान में बड़े पैमाने पर वोट कटे हैं और यह पूरी कार्रवाई भाजपा के इशारे पर हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस जनता के बीच जाएगी और पूरा सच सामने लाएगी।


हर विधानसभा में हजारों वोट कटने का दावा

कांग्रेस का आरोप है कि राज्य की हर विधानसभा सीट पर 5 से 6 हजार कांग्रेस समर्थकों के नाम हटाए गए। पार्टी का कहना है कि भाजपा समर्थकों के नाम जोड़ने और कांग्रेस के वोट काटने की रणनीति अपनाई गई। विपक्ष का यह भी कहना है कि जिन नामों को हटाया गया, उनमें बड़ी संख्या में वे मतदाता शामिल हैं जो पहले नियमित रूप से मतदान करते रहे हैं।

भाजपा का पलटवार: आरोप निराधार

भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि SIR एक नियमित और पारदर्शी प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य गलत, मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाना है। भाजपा का दावा है कि इस प्रक्रिया में किसी भी राजनीतिक दल के साथ भेदभाव नहीं किया गया।

यूपी और राजस्थान की तुलना

आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में SIR के दौरान हर पांचवां मतदाता सूची से बाहर हुआ है, जबकि राजस्थान में यह आंकड़ा हर तेरहवां मतदाता बताया जा रहा है। राजस्थान में कुल 5.46 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 41.85 लाख नाम हटाए गए, जो करीब 7.7 प्रतिशत है। वहीं यूपी में 15.44 करोड़ मतदाताओं में से 2.89 करोड़ नाम हटे, जो लगभग 18.7 प्रतिशत बैठता है।

चुनाव आयोग का पक्ष

चुनाव आयोग और राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी का कहना है कि SIR के तहत राजस्थान में अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर काम हुआ है। अधिकारियों के मुताबिक, भौगोलिक परिस्थितियां, पलायन, मृत्यु और दोहरे नाम जैसी वजहों से मतदाता सूची में संशोधन जरूरी होता है। आयोग का कहना है कि पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत और दस्तावेजों के आधार पर की गई है।

आगे क्या करेगी कांग्रेस?

कांग्रेस ने साफ किया है कि वह इस मुद्दे को लेकर विधानसभा से लेकर सड़क तक संघर्ष करेगी। पार्टी का कहना है कि यदि जरूरत पड़ी तो कानूनी रास्ता भी अपनाया जाएगा। वहीं, भाजपा का कहना है कि कांग्रेस चुनावी हार के डर से बेवजह का भ्रम फैला रही है।

               SIR को लेकर उठा विवाद अब सियासी रंग ले चुका है। जहां कांग्रेस इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बता रही है, वहीं भाजपा और चुनाव आयोग प्रक्रिया को निष्पक्ष बता रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजस्थान की राजनीति में और अधिक गरमाने की संभावना है। जनता की नजर अब इस बात पर है कि सच्चाई क्या है और किसके दावे तथ्य के ज्यादा करीब हैं।