प्रताड़ना की दर्दनाक कहानी: साधु फतेहनाथ की आत्महत्या, सुसाइड नोट में गुरु के 'झूठे वचनों' का खुलासा और 7 पर मारपीट के आरोप
राजस्थान के झुंझुनूं जिले के खेतड़ी थाना क्षेत्र में पपुराना गांव की पहाड़ी पर स्थित आश्रम में 30 वर्षीय साधु फतेहनाथ ने सोमवार रात फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मौत से पहले उन्होंने एक वीडियो बनाया और 8 पेज का सुसाइड नोट लिखा,
झुंझुनूं, 30 दिसंबर 2025: राजस्थान के झुंझुनूं जिले में एक साधु की आत्महत्या ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है। खेतड़ी थाना क्षेत्र के पपुरना गांव की पहाड़ी पर स्थित आश्रम में 30 वर्षीय साधु फतेहनाथ ने फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। मौत से पहले उन्होंने एक भावुक वीडियो रिकॉर्ड किया और आठ पेज का विस्तृत सुसाइड नोट लिखा, जिसमें परिवार के सदस्यों और आश्रम के साथियों पर लंबे समय से चली आ रही मारपीट, मानसिक प्रताड़ना और धमकियों के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस घटना ने नाथ संप्रदाय के आश्रमों में हो रही कथित अन्याय की बहस को फिर से जिंदा कर दिया है।
साधु फतेहनाथ की पहचान और पृष्ठभूमि
मृतक साधु की पहचान फतेहनाथ (उम्र 30 वर्ष), पुत्र गिरधारी लाल, निवासी नागला नाथुसर के रूप में हुई है। वे करीब पांच साल से पपुरना की पहाड़ी पर स्थित आश्रम में धूणा लगाकर अकेले रह रहे थे। सुसाइड नोट और वीडियो में फतेहनाथ ने अपना बचपन का नाम फतेहचंद बताया। उनके अनुसार, जब वे मात्र छह महीने के थे, तभी उनके पिता गिरधारी लाल का निधन हो गया। इसके बाद उनकी बड़ी बुआ उन्हें कंचनपुर ले आईं, जहां बुआ के बेटे लक्ष्मण ने उन्हें लगातार परेशान किया। पैतृक जमीन और गहनों को लेकर भी उन्हें धमकियां दी जाती थीं और बर्बाद करने की बात कही जाती थी। इस पारिवारिक प्रताड़ना ने उनके जीवन की शुरुआत ही कष्टमय बना दी।
आश्रम जीवन की शुरुआत और बढ़ती प्रताड़ना
फतेहनाथ का आध्यात्मिक सफर 29 अप्रैल 2012 को शुरू हुआ, जब वे बगड़ स्थित चंद्रनाथ योग आश्रम में शामिल हुए। 31 मार्च 2013 को उन्हें भगवा वस्त्र प्रदान किए गए और वे साधु बन गए। लेकिन यहां भी मुश्किलें कम नहीं हुईं। आश्रम में विक्रम नाथ महाराज उन्हें लगातार परेशान करते थे। फतेहनाथ ने इसकी शिकायत अपने गुरु चंद्रनाथ महाराज से की, लेकिन गुरु ने केवल "जल्द समझा देने" का आश्वासन दिया। सुसाइड नोट में विक्रम नाथ के शब्दों का जिक्र है: "तुम चढ़ाए हुए नहीं हो, इसलिए तुझे चिरा नहीं लगने देंगे।" इस तरह की बातें उनकी मानसिक स्थिति को और बिगाड़ती रहीं।
प्रताड़ना से तंग आकर फतेहनाथ कुछ समय के लिए आश्रम से बाहर रहने लगे। दो महीने बाद गुरु के कहने पर वे वापस लौटे, लेकिन स्थिति नहीं सुधरी। आखिरकार, 2021 में वे पपुरना आश्रम में अलग रहने लगे। सुसाइड नोट में 2022 की एक घटना का भी उल्लेख है, जब बगड़ आश्रम में गुरु से मिलने गए तो विक्रमनाथ और अन्य लोगों ने खाना खाते समय उनके साथ मारपीट की। इन घटनाओं ने उन्हें पूरी तरह तोड़ दिया।
सुसाइड नोट और वीडियो में लगाए गए आरोप
आठ पेज के सुसाइड नोट में फतेहनाथ ने स्पष्ट लिखा है कि "बाबा चंद्रनाथ के वचन झूठे हो गए।" उनके गुरु पर इन लोगों का दबाव था, जिससे उनकी जिंदगी बर्बाद हो गई। उन्होंने अपनी मौत के लिए निम्नलिखित सात लोगों को जिम्मेदार ठहराया:लक्ष्मण राम (कंचनपुर)
मीरा देवी (चौकड़ी)
अमृता देवी (गुरारा)
सुरेश (नांगल नाथुसर)
विक्रमनाथ (योग आश्रम बगड़)
भानी नाथ (योग आश्रम बगड़)
साध्वी ओमनाथ
फतेहनाथ ने लिखा कि बगड़ आश्रम में कई अन्य लोगों के साथ भी अन्याय हुआ है और इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। वीडियो में उन्होंने भावुक होकर इन प्रताड़नाओं का जिक्र किया और कहा कि इन लोगों की वजह से उनकी जिंदगी नर्क बन गई। उन्होंने न्याय की गुहार केंद्र सरकार, राज्य सरकार और नाथ संप्रदाय के प्रमुख महंत योगी आदित्यनाथ से लगाई है।
इसके अलावा, उन्होंने अपनी पैतृक संपत्ति के बारे में इच्छा जताई
:अपनी हिस्से की जमीन सीताराम गौशाला (कुआं रींगस) के नाम करने की मांग।
घर की जमीन पर शिवालय बनवाने की इच्छा।
बहन अमृता देवी को अपनी हिस्से की जमीन न देने की स्पष्ट बात।
घटना का खुलासा और पुलिस कार्यवाही
सोमवार रात करीब 8 बजे कुछ ग्रामीण आश्रम के बाहर से गुजरे, तो उन्हें कमरे का दरवाजा खुला दिखा। पास जाकर देखा तो फतेहनाथ फांसी के फंदे पर लटके हुए थे। ग्रामीणों ने तुरंत खेतड़ी थाने में सूचना दी। थानाधिकारी मोहनलाल पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और शव को कब्जे में लेकर राजकीय उप जिला अस्पताल की मोर्च्यूरी में रखवाया गया। पुलिस ने सुसाइड नोट, वीडियो और अन्य सबूतों को जब्त कर लिया है।
पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है। सुसाइड नोट में लगाए गए आरोपों की पड़ताल की जा रही है। आरोपियों से पूछताछ और आश्रम से जुड़े अन्य लोगों के बयान लिए जा रहे हैं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार है, लेकिन प्राथमिक जांच में यह आत्महत्या का मामला प्रतीत हो रहा है। इस घटना ने आश्रमों में हो रही कथित उत्पीड़न की समस्या पर सवाल खड़े कर दिए हैं, और स्थानीय लोग न्याय की मांग कर रहे हैं।