राजस्थान में मनरेगा को लेकर सियासी घमासान, कांग्रेस ने छेड़ा ‘मनरेगा बचाओ अभियान’

राजस्थान में मनरेगा को लेकर कांग्रेस का हमला, बढ़े राज्य के खर्च और फंड संकट पर सरकार से सवाल

Jan 8, 2026 - 15:31
राजस्थान में मनरेगा को लेकर सियासी घमासान, कांग्रेस ने छेड़ा ‘मनरेगा बचाओ अभियान’

राजस्थान में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को लेकर राजनीति तेज हो गई है। कांग्रेस ने केंद्र और राज्य सरकार पर मनरेगा को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए ‘मनरेगा बचाओ अभियान’ की तैयारी शुरू कर दी है। जयपुर में हुई एक अहम बैठक में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। इस बैठक में मनरेगा से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई और आगामी रणनीति तय की गई।

कांग्रेस का आरोप: मजदूर का फंड अब दिल्ली से तय होगा

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि अब राजस्थान के मजदूरों के लिए मिलने वाला मनरेगा फंड भी दिल्ली से तय होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले राजस्थान सरकार इस योजना में केवल 10 प्रतिशत हिस्सा देती थी, लेकिन अब यह बोझ बढ़कर 40 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा। जूली ने इसे राज्य के गरीब और मजदूर वर्ग के साथ अन्याय बताया।उन्होंने कहा कि राज्य की वित्तीय स्थिति पहले से ही कमजोर है और ऐसे में अतिरिक्त बोझ डालना व्यावहारिक नहीं है। जूली के मुताबिक, इसका सीधा असर गांवों में काम करने वाले मजदूरों पर पड़ेगा।

मनरेगा का उद्देश्य और कांग्रेस की भूमिका

टीकाराम जूली ने मनरेगा के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, तब सोनिया गांधी के नेतृत्व में और तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा यह कानून लागू किया गया था। उन्होंने बताया कि मनरेगा का मकसद गांव से पलायन रोकना, बंधुआ मजदूरी से लोगों को मुक्ति दिलाना और ग्रामीण क्षेत्रों में ही रोजगार उपलब्ध कराना था।जूली ने कहा कि इसी सोच का नतीजा है कि मनरेगा के तहत देशभर में ऐतिहासिक स्तर पर काम हुआ और करोड़ों गरीब परिवारों को इसका लाभ मिला।

योजना के नाम बदलने पर सवाल

नेता प्रतिपक्ष ने मनरेगा के नाम बदलने को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पहले धीरे-धीरे योजना का नाम बदलने का “नाटक” किया गया। भगवान श्रीराम के नाम पर योजना का नाम रखने पर कांग्रेस को कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन योजना को ही कमजोर करना या खत्म करना गरीबों के पेट पर लात मारने जैसा है।उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि राजस्थान में भी ईआरसीपी योजना का नाम चार-चार बार बदला जा चुका है, लेकिन नाम बदलने से असली समस्या का समाधान नहीं होता।

मुख्यमंत्री से सीधा सवाल

टीकाराम जूली ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री खुद सरपंच रह चुके हैं और उन्हें मनरेगा की जमीनी हकीकत अच्छी तरह पता होनी चाहिए। इसके बावजूद जनता को गुमराह किया जा रहा है।जूली ने कहा कि एक पूर्व सरपंच होने के नाते मुख्यमंत्री को समझना चाहिए कि मनरेगा गांवों के लिए कितनी जरूरी योजना है।

राज्य सरकार की आर्थिक स्थिति पर कटाक्ष

कांग्रेस नेताओं ने राजस्थान सरकार की आर्थिक स्थिति पर भी सवाल उठाए। जूली ने कहा कि आज हालात ऐसे हैं कि राज्य सरकार समय पर पेंशन नहीं दे पा रही है। स्कूलों में किताबें समय पर नहीं पहुंच पा रहीं और सरकारी अस्पतालों में दवाइयों की कमी बनी हुई है।उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार इन बुनियादी जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रही है, तो मनरेगा के लिए आने वाला अतिरिक्त फंड कहां से लाया जाएगा। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि सरकार यह पैसा कहां से काटेगी और किस योजना से निकालेगी।

आंदोलन की तैयारी में कांग्रेस

बैठक में मौजूद नेताओं ने साफ संकेत दिए कि कांग्रेस मनरेगा को लेकर सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी। ‘मनरेगा बचाओ अभियान’ के तहत गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक किया जाएगा और सरकार की नीतियों का विरोध किया जाएगा।कांग्रेस का कहना है कि मनरेगा सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण गरीबों के जीवन का सहारा है। इसे कमजोर करने की किसी भी कोशिश के खिलाफ पार्टी पूरी ताकत से खड़ी रहेगी।