बिजली बिल से खुली पेंशन की पोल: 3 लाख से ज्यादा लाभार्थियों की पेंशन पर लटकी तलवार,

राजस्थान सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत 3 लाख से ज्यादा लाभार्थियों की पेंशन रोक दी है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने 24 हजार रुपये से अधिक सालाना बिजली बिल भरने वाले 2,05,998 परिवारों के 3,02,000 पेंशनर्स की आय की जांच के आदेश दिए हैं

Oct 13, 2025 - 16:47
बिजली बिल से खुली पेंशन की पोल: 3 लाख से ज्यादा लाभार्थियों की पेंशन पर लटकी तलवार,

जयपुर, 13 अक्टूबर 2025: राजस्थान सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत लाखों बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों की जिंदगी पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। बिजली बिल के आधार पर आय की जांच के नाम पर 3 लाख से ज्यादा पेंशन लाभार्थियों की मासिक पेंशन रोक दी गई है। यह कदम सरकार की 'अपात्र लाभार्थियों को बाहर करने' की मुहिम का हिस्सा है, लेकिन इससे गरीब परिवारों में हाहाकार मच गया है। क्या यह जांच निष्पक्ष होगी या निर्दोषों का पेंशन छीना जाएगा? आइए, इस विवादास्पद फैसले की पूरी कहानी समझते हैं।

बिजली बिल: आय का 'मीटर' बन गया जांच का आधार

सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने एक अनोखी रणनीति अपनाई है। आयोजना विभाग (प्लानिंग डिपार्टमेंट) के अधीन जनाधार प्राधिकरण ने तीनों बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) से सितंबर 2023 से अगस्त 2024 तक के बिजली बिलों की रिपोर्ट मंगाई। इस रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ: 2,05,998 परिवारों के कुल 3,02,000 पेंशन लाभार्थियों ने सालाना 24 हजार रुपये से ज्यादा का बिजली बिल भरा है।  

 विभाग के प्रमुख सचिव आशीष मोदी ने सभी कलेक्टरों को पत्र लिखकर सख्त निर्देश दिए हैं। पत्र में कहा गया है कि इतना ऊंचा बिजली बिल भरने वाले पेंशनर्स की आवेदन के समय की गई 48 हजार रुपये सालाना आय की घोषणा 'संदेहास्पद' लगती है। इसलिए, इनकी आय की नए सिरे से गहन जांच कराई जाए। जांच पूरी होने तक पेंशन स्थगित रहेगी।

नोटिस की बौछार: विभाग ने 24 हजार से ज्यादा का बिल भरने वाले हर पेंशनर को नोटिस जारी करने के आदेश दिए हैं। ये नोटिस संबंधित पेंशन मंजूर करने वाले अधिकारियों के स्तर से भेजे जाएंगे। 

जांच का दायरा: आय पात्रता की गहराई से पड़ताल होगी, जिसमें परिवार की कुल आय, संपत्ति और अन्य स्रोतों का आकलन शामिल है।

फैसला क्या होगा? अगर जांच में सालाना आय 48 हजार रुपये से ज्यादा पाई गई, तो पेंशन स्थायी रूप से रद्द कर दी जाएगी। वहीं, अगर आय 48 हजार या इससे कम निकली, तो रोकी गई पेंशन तुरंत बहाल हो जाएगी।

यह सीमा राजस्थान में सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लिए तय है। योजना के तहत बुजुर्ग, विधवा और दिव्यांगों को 1,000 से 1,500 रुपये मासिक पेंशन मिलती है, जो हर साल 15 प्रतिशत बढ़ाई जाती है। लेकिन अब बिजली बिल इस पेंशन का 'गेटकीपर' बन गया है।

जुलाई से चल रहा 'गिव-अप' अभियान: अपील, लेकिन अब सख्ती

यह पहली बार नहीं है जब सरकार ने अपात्र पेंशनर्स पर निशाना साधा। जुलाई 2025 में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत ने अपील जारी की थी: अपात्र लाभार्थी स्वेच्छा से पेंशन 'गिव-अप' कर दें। अभियान के दौरान गिव-अप करने वालों को कोई कानूनी कार्रवाई न करने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन अब जब स्वैच्छिक कदम पर लोग नहीं चेते, तो विभाग ने जांच और वसूली का रास्ता अख्तियार कर लिया।सूत्रों के अनुसार, अगर जांच में अपात्रता साबित हुई, तो सरकार रोकी गई पेंशन का पैसा वसूल भी कर सकती है। यह वसूली ब्याज समेत हो सकती है, जो पेंशनर्स के लिए दोहरी मार साबित होगी। 

आंकड़ों की बाजी: 3 लाख संदिग्ध, लेकिन कितने अपात्र?

प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा पेंशन के 91 लाख से ज्यादा लाभार्थी हैं। इनमें से 3 लाख से ज्यादा पर शक की तलवार लटक रही है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि बिजली बिल हमेशा आय का सटीक संकेतक नहीं होता।

उदाहरण: एक पेंशनर का बेटा या रिश्तेदार बिल भरता हो, या किराए का मकान हो जहां बिल नाम पर आता हो—ऐसे केसों में निर्दोष फंस सकते हैं। 

विभाग का पक्ष: मंत्री गहलोत ने कहा, "पेंशन गरीबों के लिए है। हम अधिक योग्य लोगों को जोड़ना चाहते हैं। डोर-टू-डोर वेरिफिकेशन से सच्चाई सामने आएगी।"

हालांकि, विपक्ष और सामाजिक संगठन चेतावनी दे रहे हैं कि यह कदम 'डिजिटल ट्रैप' है, जो तकनीकी खामियों से गरीबों को नुकसान पहुंचा सकता है। याद रहे, मार्च 2024 में भी 15.5 लाख पेंशनर्स की पेंशन अस्थायी रूप से रुकी थी, जिसका बहाना आधार-जन आधार में मिसमैच बताया गया था।

 गरीबों की पुकार: पेंशन रुकी तो जिंदगी रुकेगी

जयपुर के एक बुजुर्ग पेंशनर रामलाल ने कहा, "हमारा बिल भतीजा भरता है, लेकिन जांच में हम फंसेंगे। 1,200 रुपये की पेंशन से दवा-दाल रोटी चलती है।" इसी तरह, जोधपुर की विधवा सुनीता बोलीं, "गिव-अप अभियान में हमने कुछ नहीं किया, अब नोटिस आया तो क्या करें?"सरकार का दावा है कि यह कदम पेंशन योजना को मजबूत करेगा, लेकिन सवाल यह है—क्या बिजली बिल से न्याय होगा या अन्याय? जांच रिपोर्ट जल्द आने वाली है, तब तक लाखों परिवारों की उम्मीदें लटकी हुई हैं। क्या यह मुहिम अपात्रों को बाहर करेगी या जरूरतमंदों को सड़क पर ला देगी? समय ही बताएगा।