धोरीमन्ना में जिला पुनर्गठन के खिलाफ उबाल, हेमाराम चौधरी चौथे दिन भी जारी धरना

धोरीमन्ना में जिला सीमा बदलाव के विरोध में चौथे दिन भी धरना जारी, हेमाराम चौधरी ने संघर्ष जारी रखने का ऐलान।

Jan 6, 2026 - 11:52
धोरीमन्ना में जिला पुनर्गठन के खिलाफ उबाल, हेमाराम चौधरी चौथे दिन भी जारी धरना

बाड़मेर और बालोतरा जिलों की सीमाओं में किए गए फेरबदल के विरोध में धोरीमन्ना कस्बे में चल रहा धरना आंदोलन चौथे दिन भी लगातार जारी रहा। कड़कड़ाती ठंड के बावजूद लोगों का जोश कम नहीं हुआ। नेशनल हाईवे-68 पर बिजली घर के सामने लगे धरना स्थल पर बड़ी संख्या में ग्रामीण, किसान, महिलाएं और युवा जुटे रहे। आंदोलन की अगुवाई कर रहे पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी ने लगातार दूसरी रात भी धरना स्थल पर बिताई, जिससे आंदोलनकारियों का मनोबल और मजबूत हुआ।

ठंड में भी डटे रहे आंदोलनकारी

सर्द मौसम के बीच अलाव जलाकर और कंबलों में लिपटे हुए लोग धरने पर बैठे नजर आए। ग्रामीणों का कहना है कि यह आंदोलन केवल प्रशासनिक फैसले के खिलाफ नहीं, बल्कि क्षेत्र की जनता की भावनाओं और सुविधाओं से जुड़ा हुआ है। लोगों ने साफ कहा कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, तब तक वे शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रखेंगे।

हेमाराम चौधरी का बयान: “यह राजनीति नहीं, जनता की लड़ाई है”

धरना स्थल पर मौजूद पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी ने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी भी प्रकार की राजनीति से प्रेरित नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्होंने पिछला विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा और पार्टी के आग्रह के बावजूद लोकसभा चुनाव से भी दूरी बनाए रखी।हेमाराम चौधरी ने कहा, “यह लड़ाई मेरी नहीं, जनता की है। जब तक सांस रहेगी, संघर्ष चलता रहेगा।” उनका कहना था कि जिला सीमाओं में किया गया बदलाव जनभावनाओं के खिलाफ है और इससे आम लोगों को रोजमर्रा के कामों में भारी परेशानी होगी।

नोटिफिकेशन के बाद भड़का विरोध

गौरतलब है कि राजस्थान सरकार ने 31 दिसंबर की तारीख वाला जिला पुनर्गठन नोटिफिकेशन 2 जनवरी की रात को जारी किया। इस नोटिफिकेशन के तहत धोरीमन्ना और गुड़ामालानी उपखंडों को बाड़मेर जिले से अलग कर नए बनाए गए बालोतरा जिले में शामिल कर दिया गया, जबकि बायतु को दोबारा बाड़मेर जिले में रखा गया।इस फैसले के सामने आते ही धोरीमन्ना क्षेत्र में असंतोष फैल गया और विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। लोगों का कहना है कि यह निर्णय बिना स्थानीय लोगों से राय लिए लिया गया है।

जनता की परेशानी को लेकर उठी आवाज

आंदोलनकारियों का तर्क है कि बालोतरा जिला बनने के बाद प्रशासनिक दफ्तरों की दूरी बढ़ जाएगी, जिससे आम लोगों को प्रमाण पत्र, न्यायिक कार्य और अन्य सरकारी कामों के लिए लंबा सफर तय करना पड़ेगा। ग्रामीणों का कहना है कि बाड़मेर जिला उनके लिए भौगोलिक और सामाजिक रूप से अधिक उपयुक्त है।धरने में शामिल लोगों ने बताया कि यह बदलाव क्षेत्र की मूल जरूरतों और सुविधाओं को नजरअंदाज कर किया गया है।

शांतिपूर्ण तरीके से जारी आंदोलन

पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी ने कहा कि जनता के पास अपनी बात रखने का यही लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण रास्ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन पूरी तरह अहिंसक रहेगा।धरना स्थल से समय-समय पर रैली निकालकर एसडीएम कार्यालय तक ज्ञापन सौंपे जा रहे हैं। प्रशासन को चेताया गया है कि अगर नोटिफिकेशन वापस नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

नोटिफिकेशन निरस्त होने तक आंदोलन जारी रहने का संकल्प

प्रदर्शनकारियों ने एक सुर में कहा कि जब तक जिला पुनर्गठन से संबंधित नोटिफिकेशन निरस्त नहीं किया जाता, तब तक धरना समाप्त नहीं होगा। लोगों ने सर्दी, गर्मी और बरसात की परवाह किए बिना संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया है।धोरीमन्ना में चल रहा यह आंदोलन अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है और आने वाले दिनों में इसके और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।