विधानसभा में हरीश चौधरी का सरकार पर हमला, भर्तियों से पर्यावरण तक उठाए बड़े सवाल

राज्यपाल अभिभाषण पर चर्चा में हरीश चौधरी ने RPSC, भर्तियों, जल-हवा और सामाजिक संतुलन पर सरकार को घेरा

Feb 3, 2026 - 19:51
विधानसभा में हरीश चौधरी का सरकार पर हमला, भर्तियों से पर्यावरण तक उठाए बड़े सवाल

राजस्थान विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान बायतु विधायक हरीश चौधरी ने प्रदेश के युवाओं, पर्यावरण और प्रशासनिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को लेकर सरकार पर तीखे सवाल खड़े किए। उन्होंने भर्ती परीक्षाओं, आरक्षण व्यवस्था, जल-हवा की स्थिति, मनरेगा और बाड़मेर से जुड़े फैसलों पर खुलकर अपनी बात रखी।

भर्तियों ने युवाओं का भरोसा तोड़ा

हरीश चौधरी ने कहा कि लगातार पेपर लीक और OMR शीट से जुड़े घोटालों ने भर्ती प्रक्रिया को संदेह के घेरे में ला दिया है। उनका कहना था कि इन घटनाओं से RPSC की साख को गहरा नुकसान पहुंचा है। लाखों युवा मेहनत के बावजूद असमंजस में हैं और संस्थाओं पर से भरोसा उठता जा रहा है। उन्होंने कहा कि मजबूत संस्थाओं के बिना कोई भी राज्य आगे नहीं बढ़ सकता।

आरक्षण रोस्टर पर चुप्पी क्यों?

विधायक ने सवाल उठाया कि अब तक आरक्षण रोस्टर सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुसार आरक्षण का सही पालन न होना सामाजिक न्याय के साथ अन्याय है। सदन को इस पर हस्तक्षेप करना चाहिए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

एक भर्ती–एक परीक्षा की मांग

‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ की चर्चा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बेरोजगार युवाओं के लिए ‘एक भर्ती–एक परीक्षा’ की व्यवस्था क्यों नहीं हो सकती। इससे परीक्षाओं में पारदर्शिता आएगी और युवाओं का मानसिक दबाव भी कम होगा।

जल, हवा और भविष्य का संकट

हरीश चौधरी ने वंदे मातरम् के ‘सुजलाम्-सुफलाम्’ भाव का उल्लेख करते हुए कहा कि जल और हवा की बिगड़ती स्थिति भविष्य के लिए खतरा है। उन्होंने चेताया कि अगर आज इन मुद्दों पर गंभीरता नहीं दिखाई गई, तो आने वाली पीढ़ियां इसके लिए हमें जिम्मेदार ठहराएंगी। उन्होंने बाड़मेर जिले में मनरेगा के तहत हुए कार्यों का उदाहरण देते हुए बताया कि लाखों टांकों के निर्माण से गांव-गांव तक वर्षा जल पहुंचा। इससे भूजल पर निर्भरता घटी और यह साबित हुआ कि सही नीति से मरुस्थलीय क्षेत्र भी जल-सुरक्षित बन सकते हैं।

जोधपुर की हवा और खेजड़ी का सवाल

विधायक ने जोधपुर की बढ़ती प्रदूषण समस्या पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि खेजड़ी के कटान और हरित आवरण के नुकसान से हालात और बिगड़े हैं। उन्होंने याद दिलाया कि खेजड़ी केवल पेड़ नहीं, बल्कि मरु संस्कृति की पहचान है।

नाम बदलने पर आपत्ति

बाड़मेर की ग्राम पंचायत देदड़ियार का नाम बदलने के फैसले पर उन्होंने असहमति जताई और कहा कि यह निर्णय बिना जनसहमति लिया गया, जो सामाजिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है। अंत में हरीश चौधरी ने कहा कि यदि सदन युवाओं, पर्यावरण और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर गंभीर चर्चा नहीं करेगा, तो लोकतंत्र की भूमिका पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।