जयपुर में लाउडस्पीकर विवाद: विधायक बालमुकुंदाचार्य ने तय मानकों की उठाई मांग
जयपुर में मस्जिदों के लाउडस्पीकर की तेज आवाज पर विधानसभा में उठा मुद्दा, आम जनता की परेशानी बनी वजह।
जयपुर में धार्मिक स्थलों पर लगे लाउडस्पीकरों की तेज आवाज को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता नजर आ रहा है। खास तौर पर मस्जिदों में लाउडस्पीकर की आवाज को लेकर उठी आपत्ति अब विधानसभा तक पहुंच गई है। हवामहल विधायक बालमुकुंदाचार्य ने राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए लाउडस्पीकरों की आवाज तय मानकों के भीतर रखने की मांग की है। उनका कहना है कि तेज आवाज से आम नागरिकों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सुबह तड़के तेज आवाज से लोगों की नींद प्रभावित
विधायक बालमुकुंदाचार्य ने कहा कि जयपुर शहर की कई बड़ी मस्जिदों पर चार से पांच मंजिला ऊंची इमारतों पर शक्तिशाली लाउडस्पीकर लगाए गए हैं। इनकी आवाज इतनी तेज होती है कि आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों की नींद और दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित होती है। उन्होंने बताया कि सुबह करीब चार बजे से ही तेज आवाज शुरू हो जाती है, जिससे बच्चों की पढ़ाई, बुजुर्गों की सेहत और बीमार लोगों को खासा नुकसान होता है।
‘यह नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन’
बालमुकुंदाचार्य ने विधानसभा में कहा कि तेज आवाज केवल असुविधा नहीं, बल्कि नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन भी है। उनका कहना था कि हर नागरिक को शांत वातावरण में रहने का अधिकार है, लेकिन लाउडस्पीकरों की अत्यधिक आवाज इस अधिकार को छीन रही है। उन्होंने इस मुद्दे को स्वास्थ्य और शिक्षा से भी जोड़ा और कहा कि लगातार शोर से मानसिक तनाव और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं।
स्थानीय स्तर पर विरोध करने से विवाद की आशंका
विधायक ने यह भी बताया कि कई इलाकों में स्थानीय लोगों ने मस्जिद प्रबंधन से लाउडस्पीकर की आवाज कम करने का अनुरोध किया, लेकिन कई बार इससे विवाद की स्थिति बन जाती है। लोगों को डर रहता है कि आवाज उठाने से इलाके का माहौल बिगड़ सकता है। इसी वजह से आम नागरिक खुलकर अपनी बात नहीं रख पाते। बालमुकुंदाचार्य ने कहा कि वे खुद इस मुद्दे को पहले भी कई बार अलग-अलग स्तरों पर उठा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई या स्पष्ट दिशा-निर्देश सामने नहीं आए हैं।
रमजान में और बढ़ जाती है परेशानी
विधायक का कहना है कि रमजान के दौरान यह समस्या और गंभीर हो जाती है। इस दौरान अतिरिक्त लाउडस्पीकर लगाए जाते हैं और आवाज का स्तर और बढ़ा दिया जाता है। पूरी कॉलोनियों में तेज आवाज गूंजती रहती है, जिससे बुजुर्गों, बीमार लोगों और छोटे बच्चों को सबसे ज्यादा दिक्कत होती है। उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों का सम्मान जरूरी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आम जनता को परेशानी झेलनी पड़े।
स्पीकर हटाने या संख्या कम करने की मांग
बालमुकुंदाचार्य ने सरकार से मांग की है कि मस्जिदों के गुंबदों पर लगे लाउडस्पीकरों की संख्या कम कराई जाए या जरूरत न होने पर उन्हें हटाया जाए। साथ ही, लाउडस्पीकर की आवाज की अधिकतम सीमा तय की जाए और उसका सख्ती से पालन कराया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मांग किसी धर्म के खिलाफ नहीं है, बल्कि ध्वनि प्रदूषण से आम जनता को राहत दिलाने के उद्देश्य से की जा रही है।
संतुलित निर्णय से बनेगा सौहार्द
विधायक ने अंत में कहा कि यदि सरकार समय रहते नियमों के अनुसार कार्रवाई करती है, तो इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई, बुजुर्गों के स्वास्थ्य और आम नागरिकों की दिनचर्या को राहत मिलेगी। साथ ही शहर में सांप्रदायिक सौहार्द भी बना रहेगा। उन्होंने सरकार से अपील की कि इस संवेदनशील मुद्दे पर संतुलित और नियमों के तहत फैसला लिया जाए, ताकि सभी वर्गों के हित सुरक्षित रह सकें और विवाद की स्थिति से बचा जा सके।