नो बैग-डे पर बवाल: ‘सत्ता पढ़ाएगी सरकार?’ डोटासरा का भजनलाल–दिलावर पर तीखा हमला

राजस्थान में नो बैग-डे आदेश पर सियासत तेज, डोटासरा ने शिक्षा को राजनीति बनाने का लगाया आरोप

Jan 3, 2026 - 17:09
नो बैग-डे पर बवाल: ‘सत्ता पढ़ाएगी सरकार?’ डोटासरा का भजनलाल–दिलावर पर तीखा हमला

राजस्थान में शिक्षा विभाग द्वारा जारी किए गए ‘नो बैग-डे’ से जुड़े एक आदेश ने राज्य की राजनीति को गर्मा दिया है। इस आदेश में स्कूलों में छात्रों के साथ ‘सत्ता और शासन’ जैसे विषयों पर चर्चा कराने की बात कही गई है। जैसे ही यह निर्देश सामने आया, विपक्ष ने सरकार पर शिक्षा को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाते हुए तीखा हमला शुरू कर दिया।

क्या है ‘नो बैग-डे’ का आदेश

शिक्षा विभाग के निर्देशों के अनुसार, तय किए गए ‘नो बैग-डे’ पर छात्रों को बिना किताबों और बैग के स्कूल बुलाया जाएगा। इस दिन पढ़ाई के पारंपरिक तरीकों की बजाय संवाद, चर्चा और गतिविधियों के ज़रिए सीखने पर ज़ोर रहेगा। इसी कड़ी में ‘सत्ता और शासन’ जैसे विषयों पर चर्चा कराने का सुझाव दिया गया है, जिसे लेकर विवाद खड़ा हो गया है।

डोटासरा का सरकार पर सीधा हमला

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इस आदेश को लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार बच्चों से आखिर किस तरह की ‘सत्ता’ की चर्चा कराना चाहती है। डोटासरा ने कहा कि क्या बच्चों को यह बताया जाएगा कि मुख्यमंत्री ‘पर्ची’ से बने हैं या फिर यह कि प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी इतनी हावी है कि मंत्रियों की भी नहीं सुनती।

सरकार के भीतर के मुद्दों पर तंज

डोटासरा ने सरकार के अंदरूनी हालात पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि क्या छात्रों को सीएमओ में हुए फेरबदल, मंत्रिमंडल विस्तार में बार-बार हो रही देरी, अधिकारियों द्वारा मंत्रियों के फोन न उठाने और सरकार के भीतर चल रही खींचतान पर भी चर्चा कराई जाएगी। उनके अनुसार, अगर ‘सत्ता और शासन’ पढ़ाना है तो इन सवालों से कैसे बचा जा सकता है।

बजरी चोरी के आरोपों का जिक्र

कांग्रेस नेता ने तंज कसते हुए यह भी कहा कि क्या बच्चों को यह बताया जाएगा कि सरकार का एक मंत्री रोज़ बजरी चोरी से होने वाले करोड़ों रुपये के नुकसान की बात करता है। उन्होंने कहा कि जब खुद सरकार के भीतर से ऐसे आरोप लग रहे हों, तो ‘सुशासन’ की चर्चा किस आधार पर होगी।

शिक्षा और राजनीति की सीमा पर सवाल

डोटासरा ने आरोप लगाया कि शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र को राजनीति का अखाड़ा बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का एजेंडा पढ़ाई सुधारने से ज़्यादा वैचारिक ध्रुवीकरण का लगता है। उनके मुताबिक, बच्चों को पढ़ाई, विज्ञान, तकनीक और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने की बजाय सत्ता की बहस में उलझाया जा रहा है।

सरकार के अनुभव पर उठाए सवाल

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के अनुभव पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि यह प्रदेश का दुर्भाग्य है कि राजस्थान को ऐसा मुख्यमंत्री मिला है जिसे शासन का अनुभव नहीं है और ऐसा शिक्षा मंत्री मिला है जिसके पास शिक्षा को लेकर कोई स्पष्ट विज़न नहीं है।

राजनीतिक बहस बनाम शैक्षणिक उद्देश्य

इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि शिक्षा में नवाचार और राजनीतिक हस्तक्षेप के बीच की रेखा कहां खींची जाए। जहां सरकार इसे छात्रों के समग्र विकास से जोड़कर देख रही है, वहीं विपक्ष इसे शिक्षा के राजनीतिकरण के रूप में पेश कर रहा है।

आगे क्या होगा

‘नो बैग-डे’ का यह मुद्दा आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है। देखना होगा कि सरकार अपने आदेश को लेकर क्या सफाई देती है और क्या इसमें कोई बदलाव किया जाता है। फिलहाल, शिक्षा से जुड़ा एक निर्णय राजस्थान की राजनीति में बड़े टकराव का कारण बन चुका है।