पाकिस्तान के जहरीले पानी से राजस्थान की फसलें तबाह: 12 हजार बीघा खेत बंजर, घरों की दीवारों में दरारें
पाकिस्तान की कच्ची सादकी नहर से रिसने वाला खारा और फ्लोराइड युक्त पानी राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में 12 हजार बीघा खेतों को बर्बाद कर रहा है। श्रीकरणपुर के 14 गांवों में भूजल स्तर 1-2 फीट तक पहुंच गया है,
श्रीगंगानगर, राजस्थान: भारत-पाकिस्तान सीमा पर बसे श्रीगंगानगर जिले के किसान इन दिनों भारी संकट से जूझ रहे हैं। पाकिस्तान की सादकी नहर से रिसने वाला खारा और फ्लोराइड युक्त पानी राजस्थान के खेतों को दलदल में बदल रहा है। इससे करीब 12 हजार बीघा खेत बंजर होने की कगार पर हैं। कपास, मूंग और ग्वार जैसी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो रही हैं। यही नहीं, गांवों में पानी का रिसाव इतना भयावह हो चुका है कि लोगों के घरों की दीवारों में दरारें पड़ रही हैं और कई मकान गिरने के कगार पर हैं।
14 गांवों में भयावह स्थिति
पिछले 12 सालों से श्रीगंगानगर के श्रीकरणपुर विधानसभा क्षेत्र के 14 गांव इस समस्या से जूझ रहे हैं। प्रभावित गांवों में 1 एक्स, 2 एक्स, 3 एक्स, 4 एक्स, 28 एच, 27 एच, 33 एच जोड़किया, 14 एस (माझीवाला), 16 एस, 9 एस, 17 एस, नग्गी, धन्नूर और 7 एस शामिल हैं। इन गांवों में भूजल स्तर 1-2 फीट की गहराई तक पहुंच गया है, जो सामान्य से कहीं ज्यादा खतरनाक है। पानी के रिसाव के कारण खेतों में दलदल बन गया है, जिससे फसलों में जड़ गलन रोग फैल रहा है और फसलें पूरी तरह नष्ट हो रही हैं।
पाकिस्तान की सादकी नहर बनी मुसीबत
भूजल विज्ञानी बरकत अली के अनुसार, पाकिस्तान की 150 किलोमीटर लंबी सादकी नहर इस समस्या का प्रमुख कारण है। यह नहर कच्ची है, 17 फीट गहरी और 300 फीट से ज्यादा चौड़ी है। ऊंचाई पर बहने वाली इस नहर से खारा और फ्लोराइड युक्त पानी लगातार रिस रहा है, जो भारत की सीमा में प्रवेश कर रहा है। यह पानी खेतों को दलदल में बदल रहा है और मिट्टी को बंजर बना रहा है। श्रीगंगानगर के कई इलाकों में भूजल पहले से ही खेती और पीने के लिए अनुपयुक्त है, और अब इस रिसाव ने स्थिति को और गंभीर कर दिया है।
भूजल स्तर का बढ़ना दूसरा बड़ा कारण
जिले में भूजल स्तर के बढ़ने के दो प्रमुख कारण सामने आए हैं। पहला, भूजल का कम उपयोग होने के कारण वाटर लेवल लगातार ऊपर आ रहा है। दूसरा, पाकिस्तान की सादकी नहर से होने वाला रिसाव। श्रीकरणपुर के सीमावर्ती गांवों में भूजल स्तर 1 मीटर से भी कम गहराई पर पहुंच चुका है, जिससे खेतों में पानी भर रहा है और फसलें बर्बाद हो रही हैं।
किसानों और गांववासियों की मुश्किलें बढ़ीं
प्रभावित गांव जिला मुख्यालय से करीब 55 किलोमीटर दूर हैं। यहां के किसानों की आजीविका पूरी तरह खेती पर निर्भर है, लेकिन फसलों की बर्बादी ने उनकी कमर तोड़ दी है। कई किसानों ने बताया कि कपास, मूंग और ग्वार की फसलें पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं। इसके अलावा, गांवों में रिसाव का पानी घरों तक पहुंच गया है, जिससे दीवारों में दरारें पड़ रही हैं और मकान ढहने की कगार पर हैं।
समाधान की राह मुश्किल
इस समस्या का समाधान आसान नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान की सादकी नहर को पक्का करना और रिसाव रोकना जरूरी है, लेकिन यह एक अंतरराष्ट्रीय मुद्दा है, जिसके लिए दोनों देशों के बीच सहयोग जरूरी है। इसके अलावा, भूजल स्तर को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय स्तर पर जल निकासी की बेहतर व्यवस्था और भूजल उपयोग को बढ़ावा देने की जरूरत है।
किसानों की मांग
प्रभावित किसान सरकार से तत्काल राहत और मुआवजे की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो उनकी आजीविका पूरी तरह तबाह हो जाएगी। साथ ही, गांववासियों ने घरों को बचाने के लिए जल निकासी और अन्य उपायों की मांग की है।