बुलडोजर न्याय पर हाईकोर्ट का भजनलाल सरकार को नोटिस, तोड़फोड़ पर रोक

फागी-दूदू सड़क मामला: राजस्थान हाईकोर्ट ने भजनलाल सरकार से 13 जनवरी तक मांगा जवाब

Jan 9, 2026 - 09:51
बुलडोजर न्याय पर हाईकोर्ट का भजनलाल सरकार को नोटिस, तोड़फोड़ पर रोक

राजस्थान हाईकोर्ट ने फागी-दूदू सड़क मार्ग की चौड़ाई बढ़ाने और सौंदर्यीकरण से जुड़े मामले में राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। अदालत ने इस मामले में 13 जनवरी तक जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ताओं की संपत्तियों पर किसी भी तरह की तोड़फोड़ की कार्रवाई पर रोक लगा दी गई है। यह आदेश जस्टिस अनुरूप सिंघी की एकलपीठ ने दिया।

क्या है पूरा मामला

यह मामला जयपुर जिले के फागी क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। फागी-दूदू सड़क मार्ग को चौड़ा करने और उसका सौंदर्यीकरण करने के लिए नगरपालिका फागी ने कुछ कदम उठाए थे। आरोप है कि इस प्रक्रिया में स्थानीय लोगों को बिना कोई व्यक्तिगत नोटिस दिए उनके पुराने पट्टे निरस्त कर दिए गए और उनकी संपत्तियों को अतिक्रमण बताकर तोड़ने की चेतावनी दी गई।इसी के खिलाफ स्थानीय नागरिकों ने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उनके पास करीब 60 साल पुराने वैध पट्टे हैं, फिर भी नगरपालिका ने नगर पालिका अधिनियम की धारा 73(बी) के तहत केवल सार्वजनिक सूचना जारी कर उनके पट्टे खत्म कर दिए।

हाईकोर्ट का सख्त रुख

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इसे गंभीर मानते हुए राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया। अदालत ने प्रमुख स्थानीय निकाय सचिव, सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) के सचिव, फागी के उपखंड अधिकारी (SDO), नगरपालिका फागी के अधिशाषी अधिकारी सहित अन्य अधिकारियों को नोटिस जारी किया है।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक अगली सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक याचिकाकर्ताओं की संपत्तियों को नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। यह राहत स्थानीय लोगों के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है, क्योंकि उन्हें अपने मकान और दुकानों के टूटने का डर सता रहा था।

याचिकाकर्ताओं की ओर से क्या दलील दी गई

याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट लक्ष्मीकांत शर्मा मालपुरा ने अदालत में पैरवी की। उन्होंने कोर्ट को बताया कि प्रभावित लोगों के पास दशकों पुराने वैध पट्टे हैं, जिनके आधार पर उन्होंने निर्माण करवाया है। इसके बावजूद नगरपालिका ने बिना किसी व्यक्तिगत नोटिस या सुनवाई का मौका दिए सीधे पट्टे निरस्त कर दिए।वकील ने यह भी कहा कि सड़क चौड़ीकरण के नाम पर लोगों की निजी संपत्तियों को अतिक्रमण बताना कानून और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।

सरकार ने मांगा जवाब के लिए समय

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता जी.एस. गिल अदालत में पेश हुए। उन्होंने सरकार की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए 13 जनवरी तक का समय मांगा। साथ ही उन्होंने अदालत को आश्वासन दिया कि अगली सुनवाई तक नगरपालिका फागी याचिकाकर्ताओं की किसी भी संपत्ति पर तोड़फोड़ की कार्रवाई नहीं करेगी।इस दौरान नगरपालिका फागी के अधिशाषी अधिकारी राजपाल बुनकर भी अदालत में मौजूद रहे।

स्थानीय लोगों को मिली राहत

हाईकोर्ट के इस अंतरिम आदेश से फागी क्षेत्र के प्रभावित लोगों को अस्थायी राहत जरूर मिली है। अब सभी की नजरें 13 जनवरी को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां सरकार की ओर से जवाब पेश किया जाएगा और आगे की कार्रवाई तय होगी।फिलहाल, अदालत का यह कदम प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल खड़े करता है और यह संदेश देता है कि विकास कार्यों में भी नागरिकों के अधिकारों और कानूनी प्रक्रिया का पालन जरूरी है।