शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने सीमावर्ती जिलों में शिक्षकों की कमी पर जताई चिंता, शिक्षा मंत्री को लिखा पत्र
विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने सीमावर्ती जिलों में शिक्षकों की भारी कमी पर शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर समान ट्रांसफर व स्टाफिंग सिस्टम लागू करने की मांग की।
जयपुर/बाड़मेर। राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में शिक्षकों की कमी और असमान स्टाफिंग व्यवस्था को लेकर
शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने राज्य के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को एक पत्र लिखकर
समान ट्रांसफर एवं स्टाफिंग पैटर्न सिस्टम लागू करने की मांग की है।
भाटी ने कहा कि सीमावर्ती इलाकों में शिक्षा की स्थिति बेहद चिंताजनक है,
जहां बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित रहना पड़ रहा है।
---
🔹 सीमावर्ती जिलों में शिक्षकों की भारी कमी
भाटी ने अपने पत्र में बताया कि प्रदेश के प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभागों में शिक्षकों के पदों की स्थिति असमान है।
उन्होंने कहा कि औसतन 13.76% पद रिक्त हैं, जबकि सीमावर्ती जिलों में यह अनुपात और भी अधिक है।
बाड़मेर में: 20.01% पद रिक्त
जैसलमेर में: 21.13% पद रिक्त
बीकानेर में: 16.87% पद रिक्त
सिरोही में: 22.52% पद रिक्त
भाटी ने कहा कि इन जिलों में शिक्षकों की कमी सीधे तौर पर ग्रामीण और सीमावर्ती क्षेत्रों के बच्चों की शिक्षा पर नकारात्मक असर डाल रही है।
🔹 समान ट्रांसफर एवं स्टाफिंग पैटर्न सिस्टम की मांग
विधायक भाटी ने लिखा कि शिक्षा विभाग में एक समान स्टाफिंग पैटर्न और ट्रांसफर नीति लागू की जाए,
ताकि प्रत्येक जिले में शिक्षकों का संतुलित वितरण सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने कहा कि फिलहाल शिक्षक स्थानांतरण और पदस्थापन में असमानता बनी हुई है, जिसके कारण कुछ जिलों में शिक्षक अधिक हैं जबकि सीमावर्ती क्षेत्रों में भारी कमी बनी हुई है।
---
🔹 सीमावर्ती जिलों को विशेष प्राथमिकता देने की अपील
भाटी ने कहा कि सीमावर्ती जिले न केवल भौगोलिक रूप से कठिन हैं, बल्कि
यहां का तापमान, परिवहन और सामाजिक परिस्थितियां भी शिक्षकों के लिए चुनौतीपूर्ण हैं।
उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इन जिलों में कार्यरत शिक्षकों को अतिरिक्त भत्ता या प्रोत्साहन दिया जाए,
ताकि वे लंबे समय तक सेवा करने के लिए प्रेरित हो सकें।
---
🔹 शिक्षा व्यवस्था सुधारने पर दिया जोर
विधायक भाटी ने कहा कि राज्य सरकार की योजनाएं तभी सफल होंगी,
जब हर विद्यालय में पर्याप्त शिक्षक मौजूद हों।
उन्होंने कहा —
> “सीमावर्ती इलाकों के बच्चे भी उतने ही प्रतिभाशाली हैं,
लेकिन संसाधनों की कमी उन्हें पीछे कर देती है।
सरकार को इन जिलों में शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।”