बागेश्वर बाबा से मिलने के लिए ढाई घंटे करना पड़ा वसुंधरा राजे को इंतज़ार, फिर एक घंटे हुई बातचीत
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की बागेश्वर बाबा से मुलाकात क्या कोई सियासी संदेश है !
राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के हालिया किशनगढ़, अजमेर और पुष्कर दौरे ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। उनकी इस राजनीतिक सक्रियता से अधिक चर्चा का केंद्र एक मुलाक़ात है जिसने सोशल मीडिया पर सबको असमंजस में डाल दिया है। दरअसल पुष्कर प्रवास के दौरान वसुंधरा राजे को कथा वाचक धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री (बागेश्वर बाबा) से मिलने के लिए करीब ढाई घंटे इंतजार करना पड़ा। बताया जाता है कि कथा के बाद सोमवार रात बाबा ने उन्हें होटल कक्ष में बुलाया, जहां दोनों के बीच लगभग एक घंटे तक बंद कमरे में चर्चा हुई। इस दौरान राजे ने उन्हें नारियल भेंट किया और आशीर्वाद लिया। तस्वीरों में धीरेन्द्र शास्त्री सोफे पर बैठे दिखे जबकि राजे जमीन पर बैठी नजर आईं, जिसने सियासी विश्लेषकों का ध्यान खींचा।
पार्टी के भीतर भी शुरू हुई नई अटकलें
पिछले कुछ समय से राजे धार्मिक आयोजनों में सक्रिय दिख रही हैं और तीर्थ स्थलों पर लगातार बयान दे रही हैं। भारतीय जनता पार्टीमें अलग प्रभाव रखने वाली वसुंधरा राजे का किसी धार्मिक व्यक्तित्व से लंबा इंतजार कर मुलाकात करना राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि इस मुलाकात का संदेश दिल्ली नेतृत्व तक कैसे पहुंचता है और आने वाले दिनों में इसका क्या असर दिखाई देता है। इस मुलाक़ात की तस्वीरें शेयर करते हुए उन्होंने लिखा ‘युवाओं के आइकॉन महाराज धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी के प्रवचन सनातन और राष्ट्र भक्ति को आगे बढ़ाने वाले है। राष्ट्रवाद और धर्म के प्रति समर्पण के भाव से ओतप्रोत महाराज का बौद्धिक समाज को नई दिशा देने वाला है।’
भाजपा में राजनीतिक रूप से फ़िलहाल उथल पुथल की संभावना अधिक नहीं है लेकिन वसुंधरा राजे की बढ़ती सक्रियता केंद्रीय नेतृत्व के लिए चुनौती जरूर साबित हो सकती है।