राजस्थान में पंचायत चुनाव खर्च सीमा बढ़ाने की तैयारी: 10% तक बढ़ सकता है बजट, जमानत राशि भी डबल करने के संकेत

राजस्थान में पंचायती राज चुनाव में खर्च सीमा 10% बढ़ाने की तैयारी, पारदर्शिता बढ़ाने की कवायद।

Nov 10, 2025 - 09:25
राजस्थान में पंचायत चुनाव खर्च सीमा बढ़ाने की तैयारी: 10% तक बढ़ सकता है बजट, जमानत राशि भी डबल करने के संकेत

राजस्थान में पंचायत चुनावों के लिए प्रत्याशियों की खर्च सीमा में 10 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की तैयारी की जा रही है। इस निर्णय से पंच, सरपंच, पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्य चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार पहले से अधिक खर्च कर सकेंगे।

सूत्रों के अनुसार, सरपंच का चुनावी खर्च 50 हजार से बढ़ाकर 55 हजार रुपए और जिला परिषद सदस्य का खर्च 1.5 लाख से बढ़ाकर 1.65 लाख रुपए किया जा सकता है। अंतिम बार खर्च सीमा वर्ष 2019 में दोगुनी की गई थी।

राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त राजेश्वर सिंह ने बताया कि "महंगाई को देखते हुए खर्च सीमा में 10 प्रतिशत या उससे अधिक की बढ़ोतरी पर विचार चल रहा है। हमारा उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी रखना और धनबल पर रोक लगाना है।"

वरिष्ठ पत्रकार नारायण बारेठ के अनुसार, लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता और जनप्रतिनिधियों की मांग को नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता। आयोग यदि खर्च सीमा बढ़ाने पर विचार कर रहा है तो यह मौजूदा आर्थिक परिस्थिति के अनुरूप कदम है।

जमानत राशि में भी बढ़ोतरी के संकेत

जानकारी के मुताबिक, सरपंच पद के लिए वर्तमान में 500 रुपए जमानत राशि तय है। अब यह राशि दोगुनी की जा सकती है। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के लिए यह 250 से बढ़ाकर 500 रुपए की जा सकती है।

खर्च का ब्योरा नहीं देने पर अयोग्यता का खतरा

राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक उम्मीदवार को चुनाव के 30 दिन के भीतर अपना संपूर्ण खर्च ब्योरा जमा करवाना होगा। समय पर ब्योरा नहीं देने पर उम्मीदवार को अयोग्य घोषित किया जा सकता है।

खर्च में क्या-क्या शामिल होगा

चुनाव प्रचार, वाहन, पोस्टर-बैनर, साउंड सिस्टम, रैलियां और अन्य प्रचार गतिविधियों का खर्च कुल सीमा में गिना जाएगा। आचार संहिता लगने से लेकर मतगणना तक के सभी खर्च इस सीमा में जोड़े जाएंगे।

वन स्टेट, वन इलेक्शन की दिशा में कदम

राजस्थान सरकार फरवरी 2026 में पंचायत चुनाव कराने की तैयारी कर रही है। इन चुनावों में पंच, सरपंच, प्रधान, जिला प्रमुख सहित सभी स्थानीय प्रतिनिधि चुने जाएंगे।

पड़ोसी राज्यों का उदाहरण

उत्तर प्रदेश में हाल ही में पंचायत चुनाव की खर्च सीमा बढ़ाई गई है, जहां ग्राम प्रधान 1.25 लाख रुपए तक खर्च कर सकते हैं। राजस्थान में भी इसी मॉडल पर विचार चल रहा है।

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