इंडिगो ने रोके 100 धावक, फिर भी जैसलमेर में ‘हेल’ की आग जली
जैसलमेर में शनिवार दोपहर 12 बजे इंदिरा गांधी स्टेडियम से देश की सबसे कठिन अल्ट्रा मैराथन ‘द बॉर्डर अल्ट्रा’ शुरू हो गई। ‘द हेल रेस’ द्वारा आयोजित इस रेस में जैसलमेर से लोंगेवाला तक 50, 100 और 160 किमी की तीन कैटेगरी हैं।
जैसलमेर। थार की तपती रेत, धूप का कहर और सीमा की कठिन ज़मीन पर आज दोपहर ठीक 12 बजे इंदिरा गांधी स्टेडियम से देश की सबसे मुश्किल अल्ट्रा मैराथनों में शुमार ‘द बॉर्डर अल्ट्रा मैराथन’ का आगाज़ हो गया। ‘द हेल रेस’ संस्था द्वारा आयोजित इस अनोखी रेस में जैसलमेर से लोंगेवाला तक का रास्ता धावकों की हिम्मत और सहनशक्ति की असली परीक्षा ले रहा है।
तीन कैटेगरी, एक ही मकसद – सीमा तक पहुंचना
इस मैराथन को तीन अलग-अलग कैटेगरी में बांटा गया है:50 किलोमीटर
100 किलोमीटर
160 किलोमीटर (पूर्ण अल्ट्रा)
सबसे लंबी 160 किमी की दौड़ को पूरा करने वाले धावक रात-दिन बिना रुके लोंगेवाला पहुंचेंगे। आयोजकों का दावा है कि तापमान 35-38 डिग्री तक रहने, रेत के टीलों और कच्चे रास्तों की वजह से यह देश की सबसे कठिन अल्ट्रा मैराथनों में से एक है।
इंडिगो फ्लाइट्स का असर, 100 धावक नहीं पहुंच सके
देशभर में इंडिगो की फ्लाइट्स में हो रही देरी और कैंसिलेशन का असर इस अंतरराष्ट्रीय स्तर की रेस पर भी पड़ा। कुल 1200 धावकों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, लेकिन करीब 100 एथलीट फ्लाइट न मिलने की वजह से जैसलमेर नहीं पहुंच पाए। फिर भी स्टार्ट लाइन पर 1000 से ज्यादा धावक मौजूद रहे।
प्रशासन भी दौड़ा – ADM, UIT सचिव और कमिश्नर ने थामा मोर्चा
रेस की खासियत यह भी रही कि जैसलमेर के प्रशासनिक अधिकारी भी आम धावकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर दौड़े।
एडीएम कलेक्टर परसा राम सैनी
यूआईटी सचिव सुखराम पटेल
नगरपरिषद कमिश्नर लजपाल सिंह सोढा
तीनों अधिकारियों ने 50 किमी कैटेगरी में हिस्सा लिया। अधिकारियों की भागीदारी से धावकों का जोश दोगुना हो गया।
रेस में देश-विदेश से आए अनुभवी अल्ट्रा रनर्स के अलावा कई नए धावक भी शामिल हैं, जो पहली बार थार की रेत में अपनी ताकत आजमा रहे हैं।आयोजकों ने पूरे रूट पर मेडिकल टीमें, हाइड्रेशन पॉइंट्स और जीपीएस ट्रैकिंग की व्यवस्था की है ताकि किसी भी धावक को कोई परेशानी न हो।
जैसलमेर की गोल्डन सिटी अब कुछ घंटों के लिए ‘रेस की नगरी’ बन चुकी है। लोंगेवाला की ओर बढ़ते ये धावक न सिर्फ मेडल जीतने निकले हैं, बल्कि अपने अंदर की ‘हेल’ को पार करने की जंग लड़ रहे हैं।