राजस्थान में अब साल में दो बार होंगे बोर्ड एग्जाम, स्टूडेंट्स को मिलेगा सुधार का मौका

शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने घोषणा की— अगले सत्र से राजस्थान बोर्ड दो बार लेगा परीक्षा, सुधार का अवसर मिलेगा।

Nov 8, 2025 - 18:36
राजस्थान में अब साल में दो बार होंगे बोर्ड एग्जाम, स्टूडेंट्स को मिलेगा सुधार का मौका
फाइल फोटो राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर

कोटा, 9 नवंबर। राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि अगले शैक्षणिक सत्र से राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) विद्यार्थियों को सत्र में दो बार बोर्ड परीक्षा देने का अवसर देगा।

यह व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के प्रावधानों के अनुसार लागू की जाएगी, जिससे छात्रों को अपने परिणामों में सुधार करने का एक और मौका मिलेगा।

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🔹 पहली बार फेल या कम नंबर आने पर मिलेगा दूसरा मौका

शिक्षा मंत्री ने कहा कि सभी विद्यार्थियों के लिए पहली बोर्ड परीक्षा में शामिल होना अनिवार्य होगा।

यदि कोई छात्र कम अंक लाता है या किसी विषय में फेल होता है, तो वह तीन विषयों तक दूसरी परीक्षा में सुधार का अवसर पा सकेगा।

पूरक योग्य घोषित विद्यार्थियों को भी अधिकतम तीन विषयों में परिणाम सुधारने की अनुमति दी जाएगी।

अगर कोई विद्यार्थी दूसरी बार भी असफल रहता है, तो उसे पुनरावृत्ति श्रेणी में रखा जाएगा और वह अगले वर्ष फरवरी माह की मुख्य परीक्षा में ही शामिल हो सकेगा।

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🔹 फरवरी-मार्च और मई-जून में होंगी परीक्षाएं

दिलावर ने बताया कि साल में एक बार मुख्य परीक्षा फरवरी-मार्च में आयोजित की जाएगी, जबकि परिणाम जारी होने के बाद उसी सत्र में दूसरी परीक्षा मई-जून में होगी।

इस परीक्षा को ‘द्वितीय अवसर परीक्षा’ नाम दिया जाएगा।

दोनों परीक्षाएं समान पाठ्यक्रम पर आधारित होंगी और अध्ययन योजना भी समान रहेगी।

'बेस्ट ऑफ टू अटेम्प्ट्स' सिद्धांत लागू रहेगा — यानी दोनों परीक्षाओं में से बेहतर अंक अंतिम परिणाम में मान्य होंगे।

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🔹 चिकित्सा कारणों से गैरहाजिर छात्रों को भी मिलेगा अवसर

मुख्य परीक्षा में अनुपस्थित रहने वाले विद्यार्थियों को द्वितीय अवसर परीक्षा में शामिल होने के लिए सक्षम अधिकारी से प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा।

यह प्रमाणपत्र जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) या चिकित्सा अधिकारी द्वारा जारी किया जा सकेगा।

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🔹 शुल्क और नियम समान रहेंगे

दूसरी परीक्षा के लिए शुल्क मुख्य परीक्षा के समान होगा।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि यह व्यवस्था विद्यार्थियों पर अकादमिक दबाव कम करेगी और उन्हें स्वयं में सुधार का अवसर देगी।

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